अगर पांच अगस्त 2019 से पहले एक वर्ष के आंकड़े देखें, तो जम्मू-कश्मीर में ऐसी 443 घटनाएं सामने आई थीं। इन 393 दिनों के दौरान पत्थरबाजों के पंजीकृत मामलों की संख्या 703 तक पहुंच गई थी, जबकि पांच अगस्त 2019 से लेकर 31 अगस्त 2020 तक ऐसे मामले 310 पर सिमट गए हैं।
जी किशन रेड्डी के मुताबिक सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। आतंकवादी संगठनों की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रभावी सुरक्षा तंत्र लागू किया गया है। राष्ट्र विरोधी तत्वों के विरुद्ध कानूनों को सख्ती से लागू करने, गहन घेराबंदी व सर्च अभियानों जैसे, कई उपाय किए गए हैं। आतंकियों को सहायता प्रदान करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी और विभिन्न एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा बलों के बीच रियल टाइम आधार पर आसूचना को साझा किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए, सीएपीएफ के सिविक एक्शन प्रोग्राम के साथ साथ 'वतन को जानो कार्यक्रम', स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम व खेलकूद इत्यादि का विशेष जोर दिया जा रहा है।