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बहुत संघर्ष के बाद केरल में महिलाओं ने पाया बैठने का अधिकार

Mon, 16 Jul 2018 11:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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देश में वैसे तो अधिकतर क्षेत्र ऐसे हैं जहां महिलाओं को उनके अधिकार मिल रहे हैं पर कई क्षेत्र आज भी इनसे वंचित हैं। ऐसा ही कुछ हो रहा था केरल के कपड़ा उद्योग में काम करने वाली महिलाओं के साथ भी। जिनके पास बैठने का अधिकार नहीं था। उन्हें घंटों खड़े रहकर काम करना पड़ता था।

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अपने बैठने का अधिकार पाने के लिए महलाओं को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। इसके लिए पी विजी नाम की महिला ने एक संघ बनाया। इसका नाम असंगतता मेखला तोजिलाली यूनियन (एएमटीयू) रखा गया। इस संघ ने ही साल 2010 में महिलाओं के अधिकारों के लिए सरकार का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इन्होंने असंगठिग क्षेत्रों में महिलाओं के महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। जिसके बाद उन्हें उनके बैठने का अधिकार मिला।

अनीथा नाम की एक महिला ने अपनी कहानी बताई कि जब अोनम का सातवां दिन था और उसके पैरों में बहुत दर्द हो रहा था लेकिन फिर भी न तो उसे टॉयलेट ब्रेक दिया गया और बैठने के लिए भी मना किया गया। लोगों को विभिन्न डिजाइनों के कपड़े दिखाते हुए जब वह थक गई तो उसने थोड़ी सांस लेने के लिए एक दीवार का सहारा लिया।
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लेकिन उतने में ही वहां उसका फ्लोर मेनेजर आ गया और अनीथा से कहने लगा कि सुस्ती दिखाना बंद करे। उसने बताया कि महीने के आखिर में उसकी तनख्वाह से 100 रुपये काट लिए गए। विदेश में बैठे दुकान के मालिक ने सीसीटीवी में उसे देख लिया था। कोजिकोड में स्थित उस दुकान से नौकरी छोड़ने के बाद अनीथा को कहीं और नौकरी लेनी पड़ी।

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अब महिलाएं ड्यूटी के समय भी बैठ सकती हैं

आज अनीथा और उसके जैसी ही अन्य महिलाओं को बैठने का अधिकार मिल चुका है। इसके लिए उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। कपड़ा उद्योग में काम करने वाली एक अन्य महिला बीना (40) ने बताया कि महिलाओं को बैठने न दिया जाना तो एक समस्या थी ही साथ ही जहां वह काम कर रही थीं वहां शौचालय न होना भी एक समस्या थी। बीना बताती हैं कि पूरे दिन खड़े रहने और शौचालय न जाने के कारण उन्हें बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

बीना बताती हैं कि उन्होंने 25 साल की उम्र से ये काम करना शुरू किया था। जिस बिल्डिंग में वह काम करती थीं वहां केवल एक ही शौचालय था जहां पुरुष भी जाते थे। वहां बहुत गंदगी होती थी। शौचालय न जाना पड़े इसके लिए बीना ने कम खाना और कम पानी पीना शुरू कर दिया।

महिला संघ की अध्यक्षता कर रही विज बताती हैं कि उनके पास बहुत सी महिलाएं ऐसी शिकायतें लेकर आईं कि उन्हें बैठने नहीं दिया जाता। अगर वह बोलती थीं कि उन्हें थोड़ी देर बैठने दिया जाए या शौचालय जाने दिया जाए तो मालिक गुस्सा हो जाता था और उन्हें नौकरी से निकाल देने की धमकी देता था।

विजी बताती हैं कि उन्होंने कई विरोध प्रदर्शन भी किए जिसके बाद सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव किया। अब महिलाएं ड्यूटी के समय में बैठ सकती हैं। उनकी स्थित में काफी सुधार आया है। अब किसी भी दुकान, रेस्टोरेंट या अन्य व्यवसायों में महिलाओं के साथ ऐसा उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।   
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