कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला एक युवक अल्ताफ अहमद मीर 22 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर पाकिस्तान चला गया था। 1990 में गया मीर एक आतंकवादी बनना चाहता था। लगभग तीन दशक से उसका परिवार आज भी मीर के लौटने का इंतजार कर रहा है। वह तो नहीं आया लेकिन अब उसका एक गाना आया है। यह गाना कश्मीर और उसके बाहर के लोगों का दिल जीत रहा है। मीर अनंतनाग के जंगलात मंडी का रहने वाला है।
यह गाना प्रसिद्ध कवि गुलाम अहमद महजूर का 'हा गुलो' है। जिसे कोक स्टूडियो एक्सप्लोरर ने प्रस्तुत किया गया है। यह पहला कश्मीरी गीत है। इसे पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में गुलाम अहमद महजूर ने गाया था। हा गुलो तूही मा सा वुचुन यार मुएन, बुलबुलू तुही त्चंदतौन डिल्डार मुएन.. मतलब- "ओह फूल, क्या आपने मेरा दोस्त देखा है, ओह बुलबुल, तुम मेरे प्यार की तलाश करो" 12 जुलाई को रिलीज हुए इस गाने को पहले 2 दिन में ही कोक स्टूडियो के यूट्यूब चैनल पर 2 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है।