आज अनीथा और उसके जैसी ही अन्य महिलाओं को बैठने का अधिकार मिल चुका है। इसके लिए उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। कपड़ा उद्योग में काम करने वाली एक अन्य महिला बीना (40) ने बताया कि महिलाओं को बैठने न दिया जाना तो एक समस्या थी ही साथ ही जहां वह काम कर रही थीं वहां शौचालय न होना भी एक समस्या थी। बीना बताती हैं कि पूरे दिन खड़े रहने और शौचालय न जाने के कारण उन्हें बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
बीना बताती हैं कि उन्होंने 25 साल की उम्र से ये काम करना शुरू किया था। जिस बिल्डिंग में वह काम करती थीं वहां केवल एक ही शौचालय था जहां पुरुष भी जाते थे। वहां बहुत गंदगी होती थी। शौचालय न जाना पड़े इसके लिए बीना ने कम खाना और कम पानी पीना शुरू कर दिया।
महिला संघ की अध्यक्षता कर रही विज बताती हैं कि उनके पास बहुत सी महिलाएं ऐसी शिकायतें लेकर आईं कि उन्हें बैठने नहीं दिया जाता। अगर वह बोलती थीं कि उन्हें थोड़ी देर बैठने दिया जाए या शौचालय जाने दिया जाए तो मालिक गुस्सा हो जाता था और उन्हें नौकरी से निकाल देने की धमकी देता था।
विजी बताती हैं कि उन्होंने कई विरोध प्रदर्शन भी किए जिसके बाद सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव किया। अब महिलाएं ड्यूटी के समय में बैठ सकती हैं। उनकी स्थित में काफी सुधार आया है। अब किसी भी दुकान, रेस्टोरेंट या अन्य व्यवसायों में महिलाओं के साथ ऐसा उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।