वीडियो में साफतौर से देखा जा सकता है कि तालिबान के लड़ाके अमेरिकी निर्मित हथियारों से लैस हैं। रॉयटर की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगान बलों, जिसमें छह लाख की पैदल सेना शामिल थी, उसे आधुनिक हथियार प्रदान किए थे। इनमें केवल M16 असॉल्ट राइफल या डेढ़ लाख से ज्यादा संचार उपकरण ही नहीं थे, बल्कि 16 हजार नाइट-विजन गॉगल्स डिवाइस भी शामिल हैं। इन उपकरणों के बलबूते, अफगान सेना ने लंबे समय तक तालिबान को रोके रखा था। यूएस ह्यूमवेस और यूएच-60 ब्लैक हॉक्स व स्काउट अटैक हेलीकॉप्टर सहित सभी उपकरण तालिबान के कब्जे में हैं।
ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) ने बताया, अमेरिकी सेना अपने सभी जरूरी उपकरण साथ ले गई है। तालिबानी लड़ाके जिन हेलीकॉप्टर्स, एयरक्रॉफ्ट, बख्तरबंद गाड़ियां, सैन्य ड्रोन व एम16 असॉल्ट राइफल के साथ वीडियो शेयर कर रहे हैं, दरअसल वे सभी अफगान आर्मी के हैं। इनमें बहुत से उपकरण तो ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल ही नहीं हुआ है। संचार उपकरण, ड्रोन और बख्तरबंद वाहनों का संचालन सिस्टम समझना आसान नहीं है। उन्हें अब ट्रेनिंग कौन देगा। इन हथियारों का इस्तेमाल एक बार तो किया जा सकता है। दूसरी बार उसका एम्युनेशन कहां से लाएंगे। सबसे बड़ी बात तकनीक की है, वह तो अमेरिका के पास ही है। एक बार वाहन खराब हो गया तो उसका पुर्जा कहां से हासिल करेंगे। अफगानिस्तान में वह पुर्जा बनता ही नहीं है। वह तो अमेरिकी सेना से ही मिलेगा। ये सब मुश्किलें तालिबान के सामने आएंगी।
अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन यह बात जानते हैं। यह बात भी सही है कि अब तालिबान के अफगानिस्तान में जो कुछ भी है, उसे वापस लेने के लिए अमेरिका गंभीर नहीं है। अमेरिका यह बात मान चुका है कि मौजूदा अफगानिस्तान में उसका जो कुछ भी है, वह सब तालिबान का हो चुका है।
भारतीय वायु सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं कि अमेरिका के यूएस ह्यूमवेस और यूएच-60 ब्लैक हॉक्स व स्काउट अटैक हेलीकॉप्टर सामान्य नहीं हैं। ये सभी देशों के पास नहीं हैं। इनके संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इस वक्त तालिबान के पास पायलटों की भारी कमी है। कहा जा रहा है कि अफगान आर्मी के बहुत से पायलटों को मार दिया गया है। संचार उपकरण, एयरक्राफ़्ट्स और हेलीकॉप्टर आदि ऐसे भी हैं जो दूसरे देश की सीमा पर लगे रडार की पहुंच से बाहर रहते हैं। ये पड़ोसी राष्ट्रों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। अमेरिका के जिन विमानों, वाहनों, मशीनगन, मोर्टार, और हॉवित्जर के साथ लड़ाकों के जो वीडियो आ रहे हैं, वे कुछ ही समय तक उनके काम के हैं। तकनीक के अभाव में वे बाद में खिलौने भी बन सकते हैं। तालिबान इस मामले में चीन से तकनीक व ट्रेनिंग लेने का प्रयास करेगा। ये चीन और तालिबान के संबंधों पर निर्भर करेगा कि चीन उसे तकनीक व ट्रेनिंग मुहैया कराएगा या नहीं। शुरू में तो चीन के लिए भी 'पेंटागन' की तकनीक को समझना आसान नहीं होगा।