रूस की ये है मंशा
देश के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस बात के बिलकुल खिलाफ है कि तालिबानियों का रुतबा मध्य एशिया में बढ़ना शुरू हो। यही वजह है कि रूस भी चीन की तरह अफगानिस्तान में काबिज हुए तालिबानियों की सत्ता को पूरा समर्थन देते हुए उनको अपने देश में ही व्यस्त रखने की रणनीतिक चाल चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तालिबान अपने मुल्क में ही सत्ता चलाने में व्यस्त रहेगा, तो वह अपना विस्तार मध्य एशिया में नहीं कर सकेगा। इससे इन इलाकों में रूस की ताकत बरकरार रहेगी।
चीन का अफगानिस्तान में डबल गेम
विशेषज्ञ कहते हैं चीन इसमें डबल गेम कर रहा है। चीन ने अफगानिस्तान में काबिज हुए तालिबानियों को अपना हितैषी बता कर उनके साथ अफगानिस्तान में कंधे से कंधा मिला रहा है। वही उत्तरी दिशा में तालिबानियों की विरोधी जनजातियों को भड़का कर नई फौज तैयार कर रहा है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि चीन अफगानिस्तान में अस्थिरता बरकरार करके अपने फायदे के सौदों की डील कराता रहेगा और जरूरत पड़ने पर ताजिकों की फौज से तालिबानियों की मुठभेड़ भी कराता रहेगा।
अफगानिस्तान में सिर्फ चीन ही तालिबान के समानांतर आतंकी संगठन नहीं खड़ा कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान भी अफगानी तालिबानियों के खिलाफ अंदरूनी तौर पर लगातार मोर्चाबंदी करता रहा है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि मुल्ला उमर के तालिबानी शासनकाल में तत्कालीन विदेश मंत्री रहे अहमद जान ने पाकिस्तान के अन्य मुस्लिम देशों के उद्योग पतियों को अपनी जमीन पर उद्योग धंधे करने के लिए आमंत्रित किया था। अहमद जान की इस घोषणा के बाद पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों की एंट्री अफगानिस्तान की जमीन पर आधिकारिक रूप से हो गई। लेकिन इन लोगों ने कारोबार की जगह वहां पर आतंकवाद की फैक्ट्रियां लगानी शुरू कर दी।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान दिखावे के तौर पर अफगान तालिबान को मुस्लिम हितों की रक्षा करने वाला संगठन बताकर समर्थन तो करता है लेकिन उसको इस बात की भी चिंता सताती रहती है कि कहीं पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान ज्यादा विस्फोटक हो जाए। क्योंकि अंदरूनी तौर पर अफगान तालिबान पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान को समर्थन करता रहता है और पाकिस्तान का तहरीक-ए-तालिबान आतंकी संगठन लगातार पाकिस्तान पर हमलावर रहता है। यही वजह है कि पाकिस्तान भी अफगानिस्तान की जमीन पर ऐसे कई संगठन खड़े कर रहा है जो अफगानी तालिबान के विरोध में ही हैं। खासकर अफगान पश्तूनों के एक विशेष जिहादी गुट को पाकिस्तान हमेशा से अफगानी तालिबानियों के खिलाफ खड़ा करता रहा है।