वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में रह रहे अफगानिस्तानी नागरिक भी वहां की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और सरकार से वहां रह रहे लोगों को बचाने की अपील कर रहे हैं। अमर उजाला वेबसाइट ने दिल्ली में रह रहे कुछ अफगानिस्ती लोगों से जब इस बारे में जानने की कोशिश की तो लोगों ने तालिबान की क्रूरता और दमनकारी नीति पर खुलकर अपनी बातें रखीं। दिल्ली में फरहाद नाम के एक युवक ने कहा कि तालिबान की क्रूरता पूरी दुनिया जानती है, जिस तरीके से अफगानिस्तान से लोकतंत्र खत्म हुआ है उससे यह साफ है कि तालिबान फिर से वहां पर आतंकवाद को बढ़ावा देगा।
वहीं, दो साल से दिल्ली में रह एक अफगानी युवक ने कहा कि तालिबान की दमनकारी नीति से दुनिया भलीभांती परिचित है। आप देखिए कि पिछले तीन दिनों के अंदर ही वहां पर महिलाओं और लड़कियों के साथ कैसा सलूक किया जा रहा है। उनकी आजादी छीनी जा रही है। पत्रकारों को घर बैठने की हिदायत दी गई है। सड़कों पर आम लोगों को पीटा जा रहा है। वहां की महिलाएं, लड़कियां सब घर के अंदर बंद हैं, उन्हें पता है कि अगर बाहर निकलेंगे तो तालिबान छोड़ेगा नहीं। लोगों में खौफ का माहौल बना हुआ है।
अफगानी युवक नजीम ने बताया कि जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, तब से दुखी हूं। मेरा पूरा परिवार अफगानिस्तान में रह रहा है। मेरे माता-पिता सरकारी कर्मचारी हैं, तालिबान के कब्जे के बाद से वहां पर सबकुछ बंद है। तालिबान के जुल्म और सितम से लोग डरे और सहमे हुए हैं। मैं रोज अपने परिवार से फोन पर बात कर रहे हैं। सभी लोग वहां से निकलना चाह रहे हैं। सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द वहां से लोगों को बुलाने की प्रक्रिया शुरू करें।
मिरदाउस ने बताया कि 15 अगस्त को ताबिलान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया तो जहन में दो दशक पहले वाला खौफनाक मंजर याद आ गया, क्योंकि तालिबान को अमन और चैन पसंद नहीं है। तालिबान लड़ाके फिर से वहां पर अत्याचार करने लगे हैं, लोगों को कोड़े मार रहे हैं। महिलाओं और लड़कियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। तालिबान अभी से बंदूक की नोंक पर सत्ता चलाने को तैयार है। हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द वहां फंसे लोगों को बाहर निकाला जाए नहीं तो वहां के लोगों की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।