सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश एचपी संदेश को एक जमानत याचिका पर सुनवाई तीन दिन रोकने का निर्देश दिया है। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस संदेश ने कर्नाटक के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो 'एसीबी' और उसके एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह के खिलाफ कथित 'प्रतिकूल' टिप्पणियां की थीं।
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कर्नाटक सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और एसीबी के एडीजीपी के वकील के प्रतिवेदन पर गौर किया। इसके बाद पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश से सुनवाई स्थगित करने को कहा।
एडीजीपी ने अपनी याचिका में उन प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया है, जो जस्टिस संदेश ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की थीं। न्यायमूर्ति संदेश ने कर्नाटक एसीबी को 'उगाही केन्द्र' और उसके प्रमुख सिंह को 'दागदार अधिकारी' कहा था।
बाद में 11 जुलाई को हाईकोर्ट के जस्टिस संदेश ने एक आदेश भी सुनाया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें स्थानांतरण की धमकी दी गई है और उन्हें यह धमकी एक अन्य न्यायाधीश के जरिये दी गई।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'हमारा मानना है कि विद्वान न्यायाधीश से मामले की सुनवाई तीन दिन के लिए स्थगित करने को कहना उचित है। इस दौरान हम 11 जुलाई को न्यायाधीश की ओर से पारित आदेश को देखने का मौका मिलेगा।