पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान अलग-अलग पार्टियों के समर्थकों-कार्यकर्ताओं में झड़प कोई नई चीज नहीं है। पश्चिम बंगाल में ऐसी घटनाएं वाम दलों के शासन से शुरू होकर ममता बनर्जी की सरकार तक अनवरत जारी हैं। इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल में सियासी प्रतिद्वंदिता में हत्याएं तक होती रही हैं।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया। मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार चौधरी ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमला किया गया। इस घटना ने पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी माहौल में तनाव को और बढ़ा दिया है।
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न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कांग्रेस नेता के साथ यह घटना तब हुई, जब अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसंपर्क अभियान में भाग ले रहे थे। आरोप है कि टीएमसी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अचानक अभियान में बाधा डाली और चौधरी समेत उनके समर्थकों पर हमला किया। इस दौरान कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह हमला सुनियोजित था और टीएमसी अपने कार्यकर्ताओं के जरिए विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है।
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चुनावी माहौल पर पड़ेगा असर
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं राजनीतिक सरगर्मी को बढ़ा देती हैं। दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल में तनाव का स्तर बढ़ रहा है। यह घटना आगामी दिनों में होने वाले प्रचार अभियानों को भी प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
अगर यह मामला बढ़ता है तो चुनाव आयोग इसे लेकर दोनों पक्षों से रिपोर्ट तलब कर सकता है। अगर जरूरी हुआ तो चुनाव आयोग आगे की जांच के निर्देश दे सकता है। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, ताकि चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। इसे लेकर चुनाव आयोग ने शनिवार को बंगाल प्रशासन को निर्देश दिए हैं।