हरियाणा के पूर्व आईपीएस वाई पूरन कुमार ने सात अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने निवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने पीछे एक लंबा चौड़ा सुसाइड नोट भी छोड़ा था। उसमें हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर और पूर्व एसपी रोहतक नरेंद्र बिजारणिया सहित कई आईएएस व आईपीएस अधिकारियों पर जातीय उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में इसी केस से जुड़े रोहतक पुलिस के एएसआई संदीप लाठर ने भी सुसाइड कर लिया था। चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी इस केस की जांच कर रही है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस हाई प्रोफाइल मामले की तह तक पहुंचने के लिए 'एसआईटी' हर एंगल से केस की जांच कर रही है। पूर्व आईपीएस की पत्नी अमनीत पी. कुमार हरियाणा में ही वरिष्ठ 'आईएएस' अधिकारी हैं। हरियाणा सरकार के विजिलेंस विभाग के मुताबिक, 2012 में उन पर सात आरोप लगे थे। इनमें कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस की 'एसआईटी' के संज्ञान में वे सभी आरोप हैं।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अमनीत पी. कुमार 'आईएएस', तत्कालीन प्रशासक हुडा फरीदाबाद व अन्य के खिलाफ मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, विजिलेंस विभाग के आदेश क्रमांक 10/35/2021-1 विजिलेंस (1) दिनांक 24 अगस्त 2012 के अनुसार, एंटी क्रप्शन ब्यूरो 'एसीबी' में शिकायत दर्ज की गई थी। जांच के दौरान कई आरोपों की पड़ताल की जानी थी।
-आरोप 1:
मुख्य प्रशासक हुडा विभाग, पंचकूला के आदेश दिनांक 8 मई 2012, द्वारा विवादित प्लाटों को हुडा के दूसरे सेक्टरों में अलॉट करने की अनुमति दी गई। कार्यालय संपदा अधिकारी, हुडा द्वारा प्लाट ड्रॉ से संबंधित फाइल, प्रशासक के कार्यालय में भेजी गई। प्रशासक हुडा ने दिनांक 14 मई 2012 को सुबह साढ़े नौ बजे 13 प्लाटों की बजाए, 10 प्लाटों का ड्रा कर दिया गया। इस अलॉटमेंट में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद उपरोक्त 10 प्लाटों का ड्रा सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया।
-आरोप 2:
दो अन्य प्लाट नंबर 527, 471 सेक्टर 21 सी फरीदाबाद के संबंध में कार्यालय संपदा अधिकारी, हुडा ने फाइल, कार्यालय प्रशासक को स्थिति स्पष्ट करने के लिए भेजी कि ये प्लाट नियतन पत्र के हिसाब से ठीक है या नहीं। मोहित अग्रवाल, सिविल जज, सीनियर डिविजन फरीदाबाद के द्वारा उक्त दोनों प्लाटों पर स्थगन आदेश किए हुए थे। विजिलेंस के पास मौजूदा दस्तावेजों में अमनीत पी. कुमार प्रशासक हुडा ने अदालत के आदेशों को अनदेखा कर अपनी शक्तियों से बाहर जाकर, उक्त दोनों प्लाट, अलॉट कर दिए। बता दें कि नियतन पत्र कमेटी में कोई भी प्रतिनिधि संपदा अधिकारी और उपायुक्त का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था। प्लाट सेक्टर 21 डी फरीदाबाद की बजाए, सेक्टर 21 सी में कुछ प्राइवेट लोगों के कहने से अलॉट कर दिए गए थे। इस प्रकरण में भी भ्रष्टाचार के आरोप प्रशासक, तत्कालीन हुडा प्रशासक के खिलाफ लगाए गए थे।
-आरोप 3:
प्लाट नंबर 33 सेक्टर 7 फरीदाबाद, विवादित होने के कारण रिज्यूम कर लिया गया। अजीत बाला जोशी, आईएएस प्रशासक, हुडा के आदेश दिनांक 20.10.2011 के अनुसार, अपील भी रद्द कर दी गई। आरोप है कि अमनीत पी. कुमार, प्रशासक ने उक्त प्लाट को रेस्टोर कर दिया, जबकि केवल वित्तायुक्त को ही ऐसे फैसले लेने की शक्तियां हैं। ऐसे में क्या प्रशासक हुडा द्वारा गैर कानूनी कार्य किया गया था।
-आरोप 4:
आर्मी कोटे में प्लाट अलॉटमेंट की शक्ति वित्तायुक्त को है न कि हुडा प्रशासक को, लेकिन अमनीत कुमार, प्रशासक हुडा ने इस पॉलिसी को अनदेखा कर दिया। आरोप है कि उन्होंने अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हुए नायब सूबेदार को 200 वर्ग फुट की बजाए 500 वर्ग फुट का प्लाट अलॉट कर दिया। इससे विभाग को वित्तीय नुकसान पहुंचा है।
-आरोप 5:
प्लाट नंबर 132 सेक्टर 16 फरीदाबाद को विजेंद्र कुमार, पूर्व प्रशासक हुडा द्वारा रद्द किया जा चुका था। उसी प्लाट को अलॉटी के साथ मिलीभगत कर दिनांक 7 मई 2012 को अमनीत पी कुमार ने अलॉट कर दिया। प्रतिवादिया ने उक्त प्लाट के संबंध में सभी फैसले अपने स्तर पर ले लिए, जबकि सभी शक्तियां वित्तायुक्त हरियाणा सरकार को थी।
-आरोप 6:
एक अन्य मामला ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर 58 फरीदाबाद में अलॉटमेंट से संबंधित था। इस प्लाट के लिए अमनीत पी कुमार, प्रशासक संपदा अधिकारी द्वारा कुछ कानूनी मामलों पर असहमति होने के बावजूद भी 46 आवेदनों की सिफारिश की। भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद भी उक्त 46 आवेदनों को अमनीत पी कुमार द्वारा रद्द कर दिया गया। हुडा, जिमखाना में अमनीत पी कुमार द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग सामने आया।
-आरोप 7:
बीआर श्योराण, उप जिला न्यायवादी, जो प्रशासक हुडा कार्यालय में नियुक्त थे, आरोप है कि अमनीत पी कुमार ने जानबूझकर उन्हें अनदेखा किया। हुडा प्रशासक ने अपने निजी मकसद के लिए रवि अत्री, जो ठेके के आधार पर संपदा अधिकारी के कार्यालय में नियुक्त थे, को अपने कार्यालय में नियुक्त कर लिया। अपील के सभी मुकदमों में रवि अत्री को उपस्थित होने के आदेश जारी किए गए। अमनीत पी कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान जितनी भी अपीलों के फैसले किए हैं, आरोप है कि उनमें रवि के माध्यम से कथित तौर पर करोड़ों रुपये एकत्रित किए गए। इससे हुडा विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों की जांच तत्कालीन उप पुलिस महानिरीक्षक एम रवि किरण 'आईपीएस' राज्य चौकसी ब्यूरो, पंचकूला हरियाणा द्वारा पूरी कर रिपोर्ट, ब्यूरो के पत्र क्रमांक 9432 दिनांक 19 जून 2013 के अनुसार, मुख्य सचिव हरियाणा सरकार चौकसी विभाग को भेजी गई थी।