एक इंटरव्यू में मंत्री ने पश्चिम बंगाल में इसके (महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया। यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्र कोई जांच करेगा, गिरिराज सिंह ने 'हां' में जवाब दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि किस तरह की जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा, 'मनरेगा एक मांग आधारित योजना है, यह हर कोई जानता है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इसके लिए अतिरिक्त धन मंजूर किया है।' वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि मनरेगा के लिए 28 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि मंजूर की गई है, जिसे अगले संसद सत्र में मंजूरी दे दी जाएगी। 2023-23 के बजट में मनरेगा के लिए आवंटन 60 हजार करोड़ रुपये था।
उन्होंने विपक्ष पर इस ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, '(कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन) खरगे और अन्य विपक्षी नेता भ्रम पैदा करते हैं। सच्चाई यह है कि पिछले नौ वर्षों के दौरान 2,644 करोड़ व्यक्ति दिवस का काम सृजित किया गया है और केंद्र के हिस्से के रूप में 6.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक जारी किए गए हैं, जो यूपीए शासन के दौरान किए गए आवंटन का तीन गुना है।'
गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि मनरेगा के तहत यूपीए सरकार के दौरान 48 फीसदी महिला श्रमिक थीं। अब यह बढ़कर 55 फीसदी हो गई हैं। हाल ही में मनरेगा सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, 'कुछ लोगों की मौत हुई होगी, इसलिए उनके जॉब कार्ड हटा दिए गए, लेकिन हर किसी की मौत नहीं हो सकती है।' उन्होंने कहा कि विभाग को नाम हटाए जाने के कारणों का पता लगाने का निर्देश दिया गया है।
संसद में एक सवाल के जवाब में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में मनरेगा सूची से 5.18 करोड़ से अधिक श्रमिकों को हटा दिया गया था। 2021-22 में 1.49 करोड़ से अधिक श्रमिकों को मनरेगा सूची से हटा दिया गया था।
आंध्र प्रदेश (78 लाख से अधिक), बिहार (76 लाख से अधिक), ओडिशा (77 लाख से अधिक), उत्तर प्रदेश (62 लाख से अधिक) और पश्चिम बंगाल (83 लाख से अधिक) जैसे राज्यों में श्रमिकों के नाम हटाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के लिए लंबित भुगतान के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है। गिरीराज सिंह ने आरोप लगाया, 'लूट चल रही है। मनरेगा के काम के नाम पर वे लिखेंगे कि बांध बनाया गया है। जब इसका निरीक्षण किया जाता है, तो वे कहते हैं कि यह बाढ़ में बह गया था।'