हिंदी फिल्मों से अपनी मिट्टी की खुशबू गायब
चित्र भारती फिल्म फेस्टिवल के पांचवें संस्करण (23-25 फरवरी 2024) के पोस्टर लांच के अवसर पर दिल्ली पहुंचे सतीश कौशिक ने कहा कि दर्शक फिल्मों में अपने गांव, बाग-बगीचों और खेत-खलिहानों की बात देखना चाहता है, लेकिन उसे ये चीजें नहीं दी जा रही हैं। यही कारण है कि अब दर्शको का एक बड़ा वर्ग इनसे दूर हो गया है। उन्होंने कहा कि तमिल-तेलगु की फिल्में अपनी संस्कृति और सभ्यता की बात करती दिखाई पड़ती हैं, यही कारण है कि उनके दर्शक उन्हें अपने सिर पर बिठा रहे हैं, जबकि हिंदी फिल्मों से अपनी मिट्टी की खुशबू गायब हो गई है।