ओबीसी आरक्षण एक्टिविस्ट का मनोज जरांगे पर आरोप
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महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने के मामले में कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार और विपक्ष को राजनीति करने से मना किया। जरांगे ने कहा जो भी राज्य और राष्ट्रीय प्रतीक को अपमानित करने में शामिल हैं, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने सिंधुदुर्ग में राजकोट किले के दौरा भी किया। बता दें कि राजकोट किले में ही छत्रपति शिवाजी महाराज की 35 फीट ऊंची प्रतिमा ढह गई थी।
मनोज जरांगे ने दी प्रतिक्रिया
शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने के बाद महाराष्ट्र में आक्रोश फैल गया। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से माफी मांगी। पत्रकारों से बात करते हुए जरांगे ने कहा, "इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को राजनीति नहीं करनी चाहिए। सरकार को इस मामले में विस्तृत जांच करानी चाहिए। ठेकेदारों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।"
जरांगे ने कहा कि विपक्ष और महायुति सरकार शिवाजी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, "यहां एक कानून होना चाहिए। जो लोग राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करते हैं, उन्हें जेल में सड़ने के लिए छोड़ देना चाहिए। ऐसे लोग कुछ दिनों में जेल से बाहर नहीं आने चाहिए।"
महाविकास अघाड़ी ने निकाला मोर्चा
महाविकास अघाड़ी ने रविवार को शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने के विरोध में मार्च निकाला। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा पीएम मोदी की माफी से 'अहंकार की बू' आ रही है। वहीं, राकांपा-एसपी के सुप्रीमो शरद पवार ने इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया।
बता दें कि 26 अगस्त को 35 फूट ऊंची छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढह गई थी। प्रतिमा का अनावरण पीएम मोदी के द्वारा पिछले साल नौसेना दिवस के मौके पर किया गया था। इस घटना के बाद शिवाजी महाराज प्रतिमा के संरचनात्मक सलाहकार चेतन पाटिल को कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया। स्थानीय अपराध शाखा की एक टीम ने कोल्हापुर पुलिस के साथ मिलकर एक अभियान चलाकर चेतन पाटिल को गिरफ्तार किया।