ट्रांसजेंडर लोगों में केवल 2 फीसदी ही अपने माता पिता के साथ रह पाते हैं। वहीं अगर यह पढ़ने लिखने की भी सोचें तो इनके लिए वह सब भी काफी मुश्किल होता है। अध्ययन में पता चला है कि इनमें से 52 फीसदी के साथ सहपाठियों द्वारा उत्पीड़न किया जाता है। 15 फीसदी के साथ अध्यापक शोषण करते हैं। इसी कारण वह अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते और बीच में ही छोड़ देते हैं। हालात तो ऐसे हैं कि यह इस बात के लिए वह पुलिस में भी शिकायत नहीं करते।
कई के साथ तो रेप और गैंगरेप भी होता है लेकिन फिर भी पुलिस को शिकायत नहीं की जाती। इसका कारण है कि पुलिस भी उनके साथ भेदभाव करती है और उनका शोषण करने से पीछे नहीं हटती। रेप जैसी वारदातों से बचने के लिए कई तो खुद को पुरुष बताकर ही जीवन जीते हैं। सरकार की ओर से इनके लिए ऐसा कोई कानून नहीं है कि यह शादी करके अपना घर बसा सकें।
इन्हें किराए के घर में रहने में भी परेशानी होती है। हाल ही में मुंबई में रहने वाले एक फिल्मकार को केवल इसलिए घर खाली करने को कहा गया क्योंकि वह ट्रांसजेंडर है। इसके अलावा दिल्ली के एक कॉल सेंटर में काम करने वाले के साथ भी यही हुआ। काम में निपुण होने के बावजूद भी उसे काम छोड़ने को कहा गया। देश में केवल तमिलनाडु ही एक ऐसा राज्य है जहां इनके विकास के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। वहां इन्हें शिक्षा, पहचान पत्र, सब्सिडी वाला खाना और फ्री हाउसिंग जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।