विश्वव्यापी महामारी बन चुके कोरोना को हराने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च को 21 दिन के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगाने का एलान किया था जो 15 अप्रैल को खत्म होना था लेकिन कोरोना मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं दिखी।
कोरोना पर काबू पाने के लिए 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। ये लॉकडाउन तीन मई तक चलेगा यानि कि अगले 19 दिन और लॉकडाउन में रहना होगा। केंद्र सरकार के एलान के बाद रेलवे ने भी तीन मई तक अपनी सभी सेवाओं पर रोक लगा दी। इसके अलावा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय विमानों की उड़ानों को तीन मई तक रद्द कर दिया गया है।
लॉकडाउन का मुख्य उद्देश्य लोगों को घरों के अंदर बंद रखना है ताकि कोरोना की चेन को तोड़ा जा सके। जब देश में लॉकडाउन लगा तब कोरोना के कुल मामले 550 थे लेकिन लॉकडाउन के बाद कोरोना के मामलों में तेजी ही आई। हालांकि लॉकडाउन का खामियाजा देश के करोड़ों लोगों को झेलना पड़ा। आइए देखते है लॉकडाउन को लेकर आंकड़ें क्या कहते हैं...
लॉकडाउन से कितनी मदद मिली?
स्वास्थ्य मंत्रालय रोजाना कोरोना की ताजा जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है। नौ अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि अगर देश में लॉकडाउन नहीं लगाया जाता तो 15 अप्रैल तक आठ लाख से ज्यादा मामले देखने को मिलते। हालांकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने ऐसे किसी शोध के होने की पुष्टि नहीं की है।
बाद में स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि ये आंकड़ों के वाग्विस्तार के आधार पर बनाया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीन आंकड़े सामने दिए...
स्रोत- देश का स्वास्थ्य मंत्रालय
- अगर लॉकडाउन नहीं लगाया होता तो 15 अप्रैल तक आठ लाख से ज्यादा मामले होते
- अगर लॉकडाउन नहीं होता और कंटेनमेंट किया जाता तो 15 अप्रैल तक एक लाख से ज्यादा मामले होते
- लॉकडाउन और देशव्यापी कंटेनमेंट की वजह से फिलहाल देश में दस हजार से ज्यादा संक्रमित मरीज हैं
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये साफ नहीं किया कि इन आंकड़ों को सामने लाने के लिए किस मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। आईसीएमआर ने एक मॉडल सार्वजनिक किया है लेकिन वह लॉकडाउन को लेकर नहीं है। तो क्या लॉकडाउन को लेकर कोई मॉडल सरकार ने सार्वजनिक किया है?
स्रोत- worldometers
इस ग्राफ में देखा जा सकता है कि फरवरी में कोरोना के मरीजों की संख्या में ज्यादा तेजी नहीं थी। चार मार्च के बाद मरीजों की संख्या इजाफा हुआ जो अब तक बढ़ ही रहा है। वायरस के लक्षण सामने आने में 14 दिन का समय लगता है। हालांकि केंद्र के एलान से पहले कई राज्यों ने लॉकडाउन लगा दिया था। कर्नाटक ने 13 मार्च और महाराष्ट्र ने 20 मार्च को लॉकडाउन का एलान कर दिया था।
अगर लॉकडाउन का कुछ असर पड़ता तो ग्राफ में कोरोना के मरीजों की संख्या को दर्शाने वाली रेखा क्षितिज रेखा की ओर मुड़ती दिखाई देती लेकिन ऐसा फिलहाल कुछ नहीं है। कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लॉकडाउन का असर अगर किसी पर पड़ा है तो वो है देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोग।
लॉकडाउन का असर ये भी हुआ कि सरकार से टेस्टिंग पर जो सवाल करने चाहिए थे वो नहीं हुए। वैश्विक मानक के आधार पर देश में बहुत कम टेस्टिंग हुई। देश में अब तक दो लाख से ज्यादा ही लोगों का टेस्ट हुआ है जबकि अमेरिका में एक दिन दस लाख लोगों का टेस्ट हो रहा है। गोवा में अब तक चार सौ टेस्ट ही हुए हैं जबकि गोवा में दुनियाभर से कितने लोग घुमने के लिए आते हैं। गोवा की आबादी 18 लाख से ज्यादा है।
कोरोना को हराने के लिए देश को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोगों के टेस्ट किए जाएं। केरल और आगरा जैसे राज्यों में ज्यादा टेस्ट और सख्त कानून के चलते कोरोना महामारी पर काबू पाया गया है। देश को भी केरल जैसा मॉडल अपनाना चाहिए ताकि ज्यादा संक्रमित लोगों का इलाज हो सके।