फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुर्घटनाओं की वैश्विक राजधानी होने के तमगे से बच सकता है भारत: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 18 Dec 2016 10:19 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
देश में साल 2014 में नेशनल और स्टेट हाईवे पर कुल 2.37 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में कम से कम 85, 462 लोग मारे गए और 2.59 लाख लोग घायल हो गए। ये सनसनीखेज नतीजे उच्चतम न्यायालय के समक्ष रखे गए आधिकारिक आंकड़ों में शामिल थे।
विज्ञापन


इनमें कहा गया कि वर्ष 2009 के आंकड़ों के अनुसार, विश्व भर में हुई सड़क दुर्घटनाओं में से सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं भारत में हुईं। इससे हर चार मिनट में एक सड़क दुर्घटना होने के संकेत मिले। 

पिछले कई साल में वाहन दुर्घटनाओं में हुई मौतों के आंकड़ों पर गौर करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि भारत ‘दुनिया की दुर्घटना राजधानी’ होने के तमगे से बच सकता है। इसके साथ ही न्यायालय ने शराब पीकर वाहन चलाने से रोकने के नियम के ‘पर्याप्त क्रियान्वयन ’ की जरूरत पर जोर दिया था। 
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि आर्थिक विकास के शीर्ष पर चल रहे भारत जैसे देश के लिए जरूरी है कि वह सड़क दुर्घटनाओं में, खासकर नशे में वाहन चालन के कारण, लोगों की कीमती जिंदगियों को बर्बाद होने से रोकने के लिए कानून का समुचित तरीके से क्रियान्वयन करे। 
विज्ञापन

भारत विश्व की दुर्घटना राजधानी होने के तमगे से बच सकता है

ये टिप्पणियां शीर्ष अदालत ने 15 दिसंबर को अपने फैसले में कीं। इसके जरिए उसने देशभर के नेशनल और स्टेट हाईवे पर शराब की सभी दुकानों को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी कर दिया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा दुकानों के लाइसेंस का अगले साल 31 मार्च के बाद नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। 

प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा, ‘मानव जीवन कीमती है। भारत में सड़कों के जाल का विस्तार होने के चलते, सड़क अवसंरचना के आर्थिक विकास का अभिन्न अंग होने के चलते, दुर्घटनाएं आम नागरिक के जीवन पर गहरा असर डालती हैं। आर्थिक विकास के रास्ते पर चल रहा देश होने के नाते, भारत विश्व की दुर्घटना राजधानी होने के तमगे से बच सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें