संयुक्त अरब अमीरात के एक होटल ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के लिए मनी लॉन्ड्रिंग फ्रंट के रूप में काम किया है, ईडी ने इस्लामिक संगठन के दो गिरफ्तार सदस्यों के खिलाफ दायर एक नए आरोप पत्र में यह दावा किया है। संघीय जांच एजेंसी ने पीएफआई नेताओं अब्दुल रजाक पीडियाक्कल उर्फ अब्दुल रजाक बीपी और अशरफ खादिर उर्फ अशरफ एमके के खिलाफ हाल ही में लखनऊ में विशेष पीएमएलए अदालत में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है।
22 करोड़ रुपये की अपराध की आय की पहचान
उन्हें एजेंसी ने मार्च और अप्रैल में गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बयान में कहा कि अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लिया है जिसमें एजेंसी ने 22 करोड़ रुपये की अपराध की आय की पहचान की है। पीएफआई केरल राज्य कार्यकारी परिषद के सदस्य अशरफ एम के की भूमिका पर ईडी ने कहा कि वह संगठन और संबंधित संस्थाओं के वित्त पोषण में शामिल था।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि अशरफ अबू धाबी में दरबार रेस्तरां का मालिक था, जो पीएफआई के मनी लॉन्ड्रिंग फ्रंट के रूप में काम करता था। हालांकि, रेस्तरां के माध्यम से अपराध की आय को छिपाने के लिए उसने दरबार रेस्तरां के स्वामित्व की बात का खुलासा नहीं किया। इसने कहा कि अब्दुल रजाक बीपी इस रेस्तरां के माध्यम से पीएफआई और इससे जुड़ी संस्थाओं की मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों को अंजाम देने में उसके साथ शामिल था।
2010 में प्रोफेसर जोसेफ के हाथ काटने का आरोपी है अशरफ
ईडी ने कहा कि अशरफ ने अपने भाई से लगभग 48 लाख रुपये की अपराध की आय हासिल की, जो दरबार रेस्तरां का प्रबंधन कर रहा था। उसके स्वामित्व वाली एक अन्य कंपनी, तामार इंडिया स्पाइसेस प्राइवेट लिमिटेड का भी अपराध की आय के लिए इस्तेमाल किया गया था। इसमें कहा गया है कि केरल में पीएफआई एर्नाकुलम जिले के पूर्व अध्यक्ष अशरफ को एनआईए ने 2010 में प्रोफेसर जोसेफ के हाथ काटने के मामले में आरोपी के रूप में पेश किया था।
ईडी ने कहा कि केरल में पेरुम्पडप्पु और मलप्पुरम के एक पीएफआई मंडल अध्यक्ष रजाक ने यूएई से लगभग 34 लाख रुपये रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ) को हस्तांतरित किए, जो पीएफआई का एक प्रमुख संगठन है। ईडी ने कहा कि इसी तरह उसने एसडीपीआई के अध्यक्ष एम के फैजी को 2 लाख रुपये हस्तांतरित किए। जांच में पाया गया कि वह विदेशों में धन जुटाने व एकत्र करने में शामिल था और उसने भूमिगत, अवैध चैनलों के माध्यम से लगभग 19 करोड़ रुपये भारत भेजे।