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अभिनंदन पर एक के बाद एक गलतियां कर खुद ही घिर गया पाकिस्तान

Fri, 01 Mar 2019 06:40 PM IST
ललित फुलारा न्यूज डेस्क,अमर उजाला
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Imran Khan
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पाकिस्तान शुक्रवार शाम को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को भारत के सुपुर्द करने जा रहा है।लहराते तिरंगों और ढोल-नगाड़ों के बीच अभिनंदन के वतन में 'अभिनंदन' का इंतजार हो रहा है । लेकिन अभिनंदन की रिहाई से पहले ही पाकिस्तान जिनेवा समझौते का उल्लंघन कर गया। आइए समझते हैं कैसे पाकिस्तान इस पूरे मामले में घिर गया है।

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20 साल पहले भी पाकिस्तान ने करगिल युद्ध के हीरो नचिकेता को सार्वजनिक तौर पर भारत को सौंपने की चाल चली थी लेकिन उस वक्त वह विफल हो गया था...तब और आज की परिस्थिति में क्या अंतर है, पाक ने शांति का शिगूफा छोड़कर क्या हासिल किया और अपनी छवि को साफ दिखाने का यह प्रयास कहां टिकता है।


पाकिस्तान की पहली गलती....जिसने उसके अशिष्ट प्रदर्शन को जाहिर किया

पाकिस्तान ने पकड़ते ही भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के कुछ वीडियो जारी किये। इसमें उन्हें अपनी पहचाज जाहिर करते, चाय पीते हुए और पाक के बेहतर बर्ताव की तारीफ करते हुए दिखाया गया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे वल्गर डिस्प्ले (अशिष्ट प्रदर्शन) बताया।

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पाक का यह कदम सीधे तौर पर तीसरे जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन था।

तीसरे जिनेवा कन्वेंशन का अनुच्छेद 13 कहता है- किसी भी युद्धबंदी के साथ हर कीमत पर मानवीय व्यवहार होना चाहिए। युद्धबंदी जब तक कैद में हो उसके साथ किसी भी तरह का अमानवीय व्यवहार नहीं होना चाहिए। युद्धबंदी के साथ कोई भी गैरकानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। युद्धबंदी के स्वास्थ्य पर किसी भी तरह का बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए और न ही उस पर ऐसी कोई सख्ती दिखानी चाहिए जिससे उसकी जान पर बन आए। अभिनंदन पर हुई सख्ती की गवाही तो उनके आने वाले वक्त के बयान से जाहिर होगी लेकिन यह तो साफ है कि जिनेवा समझौते का पाक उल्लंघन कर गया।


दूसरी गलती- अभिनंदन की खून से सनी तस्वीर सार्वजनिक करना

पाकिस्तान की तरफ से अभिनंदन के खून से सने चेहरे वाली तस्वीरें साझा की गई। सेना के प्रवक्ता ने सीधे तौर पर अभिनंदन की तस्वीर को ट्वीट किया। इससे पहले पूछताछ वाला वीडियो जारी किया गया..ये दोनों ही चीजें सीधे तौर पर जिनेवा समझौते का उल्लंघन हैं। क्योंकि जिनेवा कन्वेंशन साफ तौर पर कहता है कि कोई भी युद्धबंदी अपमान और सार्वजनिक जिज्ञासा का विषय नहीं बनना चाहिए। उसके साथ हिंसा की घटना नहीं होनी चाहिए।


क्यों बनाया गया अभिनंदन का वीडियो और सीमा से बाहर की गई पूछताछ 

  • जिनेवा कन्वेंशन में साफ तौर पर युद्धबंदी की तस्वीर साझा करने पर मनाही है।
  • युद्धबंदी का वीडियो बनाना और उसे टेलीविजन पर दिखाना भी समझौते के विरूद्ध है।


नाम और रैंक पूछी जाती है लेकिन इससे ज्यादा पूछताछ की गई...

जिनेवा कन्वेंशन कहता है कि आप युद्धबंदी से सिर्फ उसका सर्विस नंबर और नाम पूछ सकते हैं लेकिन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पाकिस्तान उसके धर्म से लेकर और क्या-क्या चीजें पूछ रहा था...। जो कि साफ तौर पर जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है...

क्या कहता है तीसरे जिनेवा कन्वेंशन का अनुच्छेद 17?

तीसरे जिनेवा कन्वेंशन का अनुच्छेद 17 साफ तौर पर कहता है कि जब किसी भी युद्धबंदी से सवाल-जवाब किया जाए तो सिर्फ उसका नाम, उपनाम, रैंक, उसके जन्म की तारीख, आर्मी और सर्विस नंबर ही पूछा जाए। लेकिन इस मामले में पाकिस्तान वीडियो बनाकर अभिनंदन से सार्वजनिक तौर पर बहुत-सी पूछताछ की जो कि जिनेवा कन्वेंशन के खिलाफ है। जिनेवा कन्वेंशन में युद्धबंदी के शारीरिक और मानसिक यातना पर भी मनाही है।

क्या जिनेवा समझौता बना अभिनंदन की रिहाई की वजह?

जिनेवा कन्वेंशन में साफ कहा गया है कि जैसे ही दोनों देशों के बीच शत्रुता और तनाव कम हो फौरन युद्धबंदी को उसके वतन को सौप देना चाहिए। अनुच्छेद 118 में साफ बताया गया है कि दो देशों के बीच जैसे ही सक्रिय शत्रुता समाप्त हो, युद्धबंदी को फौरन, बिना देरी के उसके देश के हवाले कर देना चाहिए। चाहे तब तक दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की शत्रुता रोकने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर हुए हों या नहीं।

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1999 का उदाहरण है हमारे सामने...

1999 फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने युद्धबंदी बना लिया था। उनकी वतन वापसी जिनेवा कन्वेंशन के तहत ही हुई थी। उस वक्त भी पाकिस्तान का विचार उन्हें सार्वजनिक तौर पर भारत के हवाले करने का था लेकिन भारत ने पाक के इस इरादे को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने आठ दिनों के भीतर ही लेफ्टिनेंट नचिकेता को अंततराष्ट्रीय समुदाय के रेड क्रॉस के हवाले कर दिया था और उनकी वतन वापसी हुई थी।

क्या वाकई में युद्धबंदी थे अभिनंदन...

अभिनंदन को न ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने युद्धबंदी माना और न ही पाकिस्तान की तरफ से उन्हें युद्धबंदी घोषित किया गया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस मामले में तीसरा जिनेवा समझौता लागू नहीं होता है। जिनेवा समझौता युद्ध और किसी भी तरह के आर्म्ड कॉन्फिलक्ट यानी सशस्त्र संघर्ष में लागू होता है। चाहे युद्ध हो या न हो। 

क्या है जिनेवा समझौता? पाकिस्तान की वो चाल..

जिनेवा समझौते की नींव 1949 में पड़ी। यह दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति का दौर था। चार जिनेवा समझौतों में से तीन के प्रोटोकॉल लागू होते हैं। इनमें से तीसरा जिनेवा कन्वेंशन युद्धबंदी के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, इसे लेकर है। जबकि आखिरी कन्वेंशन युद्ध के वक्त नागरिकों की सुरक्षा पर केंद्रित है।

दरअसल, पाकिस्तान इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी छवि को पाक बनाने की कोशिश में था लेकिन यहां भी गलती कर गया। भारत चाहता था कि अभिनंदन को हवाई मार्ग के जरिए सौपा जाए लेकिन पाक ने इस मांग को ठुकरा दिया और वाघा बॉर्डर पर सौपने की जिद पर अड़ा रहा। भारत ने जहां  बीटिंग रिट्रीट को रद्द कर दिया था पाकिस्तान ने वहीं अपने यहां बीटिंग रिट्रीट जारी रखी और  इसी दौरान अभिनंदन को बॉर्डर पर लाया गया। 

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