दरअसल, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन के बाद कैलाश गहलोत सरकार में सबसे वरिष्ठ और आलाकमान के भरोसेमंद माने जाते हैं। उनके पास इस समय दिल्ली परिवहन के साथ कई अन्य महत्त्वपूर्ण विभाग हैं। लेकिन कैलाश गहलोत पर पहले ही डीटीसी बसों की खरीद में घोटाले करने के आरोप हैं। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कैलाश गहलोत के परिवहन मंत्री रहते हुए दिल्ली सरकार ने एक हजार डीटीसी बसों की खरीद प्रक्रिया शुरू की थी। भाजपा का आरोप है कि इन 1000 बसों की खरीद और इनके रखरखाव मामले में भ्रष्टाचार किया गया है।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने डीटीसी बसों की खरीद के मामले में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने का मामला सीबीआई को सौंप दिया था। इस मामले की जांच जारी है। माना जा रहा है कि इस मामले में भी जल्दी ही रिपोर्ट अदालत में सौंपी जा सकती है। इसके बाद कैलाश गहलोत पर भी कार्रवाई हो सकती है।
राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता है। उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी का चुनाव प्रचार अभियान संभाला था और पार्टी को शानदार सफलता हासिल हुई थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का काम संभाला था और पार्टी वहां भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही।
लेकिन राघव चड्ढा के दिल्ली जल बोर्ड में प्रमुख पद पर रहते हुए जल बोर्ड में आपत्तिजनक हेरफेर करने के आरोप हैं। आरोप है कि पुरानी पाइपों को बदलकर नए करने के मामले में भी घोटाला किया गया था। चड्ढा इस मामले में कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों में दिल्ली डायलॉग कमीशन के पूर्व चेयरमैन जैस्मिन शाह का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। लेकिन उपराज्यपाल ने कमीशन की कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितता पाई थी और इसे असंवैधानिक संस्था करार दिया था। माना जा रहा है कि इस मामले में जैस्मिन शाह भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।