शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने रविवार को केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के कूनो में आए चीतों से क्या मुंबई चिड़ियाघर में आईं पेंग्विन की तरह राजस्व में इजाफा हुआ। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि चीतों को भारत लाने के बाद कितना राजस्व बढ़ा।
उन्होंने दावा किया कि मुंबई के वीरमाता जीजाबाई भोसले बोटेनिकल उद्यान में पेंग्विन आने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की कमाई बढ़ी है। दरअसल प्रशासक के अधीन आने से पहले शिवसेना द्वारा संचालित बीएमसी ने 2016 में आठ हम्बोल्ट पेंग्विन मंगाई थी। इसमें से एक पेंग्विन की कुछ दिन बाद मृत्यु हो गई थी। पेंग्विन के देखभाल पर हो रहे खर्च पर बीजेपी लगातार शिवसेना को घेरती रहती थी। पेंग्विन के देखभाल के लिए निकले टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप भी भाजपा ने लगाया था। ऐसा माना जाता था कि यह परियोजना आदित्य ठाकरे के निर्देशन में ही शुरू हुई थी।
नामीबिया से आए थे आठ चीते
दरअसल, नामीबिया से आठ चीते सितंबर 2022 में भारत लाए गए थे। फिर दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते पिछले साल फरवरी में लाए गए थे। कुछ चीतों को शुरू में जंगल में छोड़ दिया गया था, लेकिन पिछले वर्ष अगस्त में तीन चीतों की सेप्टीसीमिया इन्फेक्शन के कारण मौत हो गई थी। भारत आने के बाद से सात वयस्क चीतों (तीन मादा और चार नर) की मौत हो चुकी है।
अभी जंगल में एक ही चीता
अभी केवल एक चीता ही जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उसे देख पाना और पकड़ना कठिन है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल सभी 25 चीते स्वस्थ हैं। इसमें 13 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं। भारत में 17 शावकों का जन्म हुआ है जिनमें 12 जीवित बचे हैं। केंद्र की चीता परियोजना संचालन समिति ने उन्हें जंगल में खुला छोड़ने का फैसला किया है।