12 अंकों की पहचान संख्या ‘आधार’ और नागरिक-राज्य के संबंधों पर उसके प्रभाव को लेकर उठ रहे विभिन्न सवालों का जवाब देने के लिए एक नई किताब बाजार में आ गई है। यह किताब आधार शुरू करने की घोषणा के ठीक आठ सालों बाद उसी दिन 6 जुलाई को रिलीज की गई है।
आधार को लागू करने की पूरी प्रक्रिया दो ऐसी सरकारों के समय में पूरी हुई, जिनकी विचारधाराएं बिल्कुल विपरीत हैं। इसलिए यह किताब आधार के लागू होने के दौरान आए उतार-चढ़ाव और उसकी बारीकियों के इतिहास को बेहद ही सटीक तरीके से बताती है।
आधार की शुरूआत 6 जुलाई, 2009 को तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने की थी। किताब में आधार पर अपने विचार को साझा करते हुए मुखर्जी ने कहा है कि इसे लाने के लिए मैंने दृढ़ निश्चय कर लिया था। इस परियोजना को कमतर आंके जाने को लेकर पुस्तक लेखक कहते हैं कि जितना अनुमानित किया गया था।
आधार का दायरा उससे कई गुना ज्यादा बढ़ गया है। ‘इन आधार : ए बायोमीट्रिक हिस्ट्री’ में डेटा प्रोटेक्शन और गोपनीयता कानूनों पर रचनात्मक बातचीत के साथ लोगों के दिमाग में बैठ चुकी इसकी कमियों का समाधान प्रस्तुत किया गया है। राजनीतिक-अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ शंकर अय्यर की इस किताब का प्रकाशन वेस्टलैंड प्रकाशन ने किया है।