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लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी आधार को हरी झंडी, मंत्री बोले- डाटा रहेगा सुरक्षित

Mon, 08 Jul 2019 07:14 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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लोकसभा में ध्वनि मत से पास होने के बाद अब आधार संशोधन अधिनियम 2019 को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार संशोधन अधिनियम 2019 को लेकर लोगों के डाटा सुरक्षा का आश्वासन दिया है। आधार संशोधन कानून बनने के बाद किसी की इच्छा के बिना उसका आधार डाटा स्टोर नहीं किया जा सकेगा और यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

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चर्चा के दौरान विपक्ष के अधिकतर सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के पीछे सरकार की मंशा उच्चतम न्यायालय के उस फैसले को निष्प्रभावी बनाना है जिसमें सर्वोच्च अदालत ने आधार कानून की धारा 57 को गैरकानूनी बताया था। 

इसके जवाब में प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जनता ने हमें कानून बनाने का सार्वभौमिक अधिकर दिया है। न्यायालय के फैसलों का हम सम्मान करते हैं लेकिन कानून बनाने के संसद का अधिकार भी सम्मान के योग्य है। 
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उन्होंने कहा कि आधार के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ के रूप में जारी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा कराने से अब तक 1.41 लाख करोड़ रुपये बचाया गया है। इसके माध्यम से 4.23 करोड़ फर्जी रसोई गैस कनेक्शन तथा 2.98 करोड़ फर्जी राशन कार्ड को हटाया गया है । इसके अलावा मनरेगा योजना में सरकारी राशि के दुरुपयोग (लीकेज) को रोका गया है।

प्रसाद ने कहा कि आधार कार्ड में धारक की मूलभूत जानकारियों का ही जिक्र है। इसमें जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदि ऐसी जानकारियों का जिक्र नहीं है जिनकी मदद से किसी की प्रोफाइलिंग की जा सके। आधार में प्रतिदिन 2.88 करोड़ जानकारियों का प्रमाणीकरण किया जाता है। इसलिये यह डाटा पूरी तरह से सुरक्षित है।

प्रसाद ने कहा कि डाटा संरक्षण कानून बनाने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। इस पर पिछले दो वर्षो से व्यापक चर्चा चल रही है। भारत डाटा संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आधार की पूरे देश में चर्चा हो रही है और इसे सभी का समर्थन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में करोड़ों लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए अध्यादेश लाया गया था। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने वाम दलों के नेता के के रागेश और इलामारम करीम के संशोधन प्रस्तावों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी ।

सिम कार्ड अनिवार्य नहीं

आधार संशोधन अधिनियम 2019 के अनुसार बैंक खातों और सिम कार्ड के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई शख्स इन कार्यों के लिए अपने आधार की जानकारी नहीं दे रहा है तो उस पर दवाब नहीं बनाया जा सकेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो सिम कार्ड लेने और बैंक खाता खुलवाने के लिए अब आपको आधार कार्ड देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहचान के तौर पर आप वोटर कार्ड पेश कर सकते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में आधार डाटा को देखा जा सकेगा अन्यथा आधार का डाटा देखते पर 3 साल की जेल हो सकती है। आधार का डाटा सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की स्थिति में ही एक्सेस किया जा सकेगा।

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