सामान्य तौर पर यह समझा जाता है कि ठंड की सबसे ज्यादा मार बेघर गरीबों पर पड़ती है और ठंड के चलते ही गरीबों की सबसे ज्यादा मौत भी होती है। लेकिन एक रिपोर्ट में यह हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है कि गरीबों की मौत ठंड से ज्यादा गर्मी के मौसम में होती है।
दिल्ली सरकार ने राजधानी में बेघरों को रहने के लिए कई शेल्टर होम्स बनाए हैं, लेकिन इसके बाद भी इनकी जरूरत बनी हुई है। अगर साल के हिसाब से बात करें, तो वर्ष 2015 में 3222 बेघरों की मौत हुई थी। इसी प्रकार वर्ष 2016 में 3398, वर्ष 2017 में 2979, वर्ष 2018 में 3289 और वर्ष 2019 में 3623 बेघरों की मौत हो गई।
वर्ष 2019 में पिछले दस सालों में सबसे ज्यादा बेघरों की मौत हुई है। साल 2009 से 2019 के बीच 36,037 बेघरों को मौसम की प्रतिकूलता से अपनी जान गंवानी पड़ी है।
दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इन मौतों के आंकड़े पर कहा कि दिल्ली सरकार बेघरों को आवास देने में असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा दुर्भाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पूरे देश में करोड़ों आवास बनाए गए हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने राजनीतिक सोच की वजह से इस योजना को लागू नहीं किया है, जिसकी वजह से लोगों को आवास उपलब्ध नहीं हो पाया है।