जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर)
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कोयले को लेकर भी लोगों ने दी अपनी राय
65 प्रतिशत लोग मानते हैं कि भारत के अधिकांश कोयले को जमीन के नीचे छोड़ देना ही सही रास्ता है। 84 प्रतिशत नए कोयला पावर प्लांट बंद करने और सोलर व पवन ऊर्जा अपनाने के पक्ष में हैं। लोगों का समर्थन खास कदमों के लिए भी मजबूत है, जैसे कि हर किसी को ग्लोबल वार्मिंग की जानकारी देना (93%), नारी और आदिवासी समूहों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सहायता देना (89%), जंगल बचाना (79%) और नए मकानों में पानी और बिजली की बचत करना (76%)।
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जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लोगों का पर्दर्शन भी
सर्वे में इस बात का भी खुलासा किया गया कि 83 प्रतिशत लोग पर्यावरण की खबरें पढ़ते हैं और 81 प्रतिशत परिवार या दोस्तों से इस बारे में बात करते हैं, लेकिन केवल 38 प्रतिशत लोग मीडिया में सप्ताह में कम से कम एक बार ग्लोबल वार्मिंग की खबर सुनते हैं। 16 प्रतिशत लोगों ने पिछले साल जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लिया, और 73 प्रतिशत ऐसे प्रदर्शन में शामिल होने को तैयार हैं अगर कोई भरोसेमंद उनसे कहे। 63 प्रतिशत को गंभीर मौसम की चेतावनी मिलती है, जिसमें टीवी (53%) और परिवार या दोस्तों (51%) की भूमिका प्रमुख है। लेकिन 36 प्रतिशत को कोई चेतावनी नहीं मिलती।
ऐसे में 74 प्रतिशत का कहना है कि गंभीर सूखा आने पर उनके घर को ठीक होने में कई महीने लगेंगे। 64 प्रतिशत ऐसा ही मानते हैं बाढ़ के मामले में। 30 प्रतिशत लोग मौसम से जुड़ी आपदाओं की वजह से घर बदलने पर भी सोच चुके हैं। सिर्फ 16 प्रतिशत के घर में एयर कंडीशनर है और 11 प्रतिशत के पास सोलर पैनल। 35 प्रतिशत लोगों को पिछले साल कम से कम एक दिन साफ पीने का पानी नहीं मिला। आय की बात करें तो आधे से ज्यादा लोग कहते हैं कि उनकी आमदनी उनकी जरूरतें पूरी नहीं करती। 27 प्रतिशत को “कुछ मुश्किलें” आती हैं, और 33 प्रतिशत को बहुत मुश्किलें।