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Global Warming: भारत में 90% लोगों ने महसूस किया ग्लोबल वार्मिंग का असर, 84% ने प्लास्टिक को ठहराया जिम्मेदार

Fri, 15 Aug 2025 02:51 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिन-प्रतिदिन जलवायु परिवर्तन दुनियाभर के लिए एक बड़े संकट के तौर पर सामने आ रही है। ऐसे में एक नए सर्वे में 90 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग का असर खुद महसूस किया है, जबकि 96 प्रतिशतमानते हैं कि यह सच है। 58 प्रतिशत लोग इसे इंसानी गतिविधियों से जुड़ा मानते हैं, वहीं 84 प्रतिशत ने प्लास्टिक प्रदूषण को दोषी ठहराया है।
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जलवायु परिवर्तन - फोटो : Freepic
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विस्तार
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दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन को लेकर चल रहे चर्चाओं के बीच बात अगर भारत की करें तो एक नए सर्वे में पता चला है कि लगभग 90 प्रतिशत भारतीयों ने खुद ग्लोबल वार्मिंग का असर महसूस किया है। साथ ही ज्यादातर लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं। यह सर्वे मार्च-अप्रैल 2025 में येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सी वोटर ने किया, जिसमें देश भर के 2,164 लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में 96 प्रतिशत लोगों ने माना कि ग्लोबल वार्मिंग सच में हो रही है। लेकिन सिर्फ 17 प्रतिशत लोग इसे लेकर बहुत ज्यादा जानते हैं। वहीं 27 प्रतिशत लोग तो कभी इस बारे में सुनें तक नहीं हैं।

लोगों ने इसको लेकर दी अलग-अलग राय

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बता दें कि सर्वे में लोगों ने इसके कारणों को लेकर अलग-अलग राय दी। 58 प्रतिशत का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण इंसानी गतिविधियां हैं, जबकि 34 प्रतिशत कहते हैं कि यह प्राकृतिक बदलावों की वजह से होती है। जब खास कारण पूछे गए, तो 82 प्रतिशत ने कहा कि पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण हैं। वहीं 61 प्रतिशत ने कोयला और गैस से चलने वाली फैक्ट्रियों को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया। लेकिन सिर्फ 26 प्रतिशत ने कहा कि मांसाहारी पशुओं के पालन से ग्लोबल वार्मिंग होती है।

अब ऐसे में दिलचस्प बात यह है कि 84 प्रतिशत ने प्लास्टिक प्रदूषण को ग्लोबल वार्मिंग का कारण माना, जबकि यह ज्यादा ग्रीनहाउस गैस पैदा नहीं करता। इसके अलावा, 37 प्रतिशत ने इसे “भगवान की इच्छा” भी बताया। वहीं 79 प्रतिशत लोगों को लगता है कि ग्लोबल वार्मिंग उनके इलाके के मौसम को प्रभावित करती है, जबकि 83 प्रतिशत का मानना है कि इसका असर मॉनसून पर भी पड़ता है।

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90 प्रतिशत लोग ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित
सर्वे में पता चला है कि 90 प्रतिशत लोग ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित हैं, जिनमें से 58 प्रतिशत बहुत ज्यादा चिंतित हैं। वहीं 89 प्रतिशत को लगता है कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए नुकसानदेह होगी। 88 प्रतिशत ने कहा कि इससे भारत के लोग प्रभावित होंगे, और 81 प्रतिशत ने अपने परिवार और समुदाय के लिए भी चिंता जताई।

वहीं 78 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि सरकार ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए और काम करे। 86 प्रतिशत भारत की 2070 तक कार्बन प्रदूषण को लगभग खत्म करने की योजना का समर्थन करते हैं। 87 प्रतिशत का मानना है कि कोयले की जगह पवन और सौर ऊर्जा से बिजली बनाने से प्रदूषण कम होगा और 85 प्रतिशत कहते हैं इससे ग्लोबल वार्मिंग में कमी आएगी। हालांकि लगभग आधे लोगों को लगता है कि इससे बिजली कटौती, बेरोजगारी और बिजली के दाम बढ़ सकते हैं। बता दें कि यह सर्वे क्लाइमेट चेंज इन द इंडियन माइंड श्रृंखला का हिस्सा है, जो 2011 से भारत में जलवायु जागरूकता पर नजर रखता है।

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जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

कोयले को लेकर भी लोगों ने दी अपनी राय
65 प्रतिशत लोग मानते हैं कि भारत के अधिकांश कोयले को जमीन के नीचे छोड़ देना ही सही रास्ता है। 84 प्रतिशत नए कोयला पावर प्लांट बंद करने और सोलर व पवन ऊर्जा अपनाने के पक्ष में हैं। लोगों का समर्थन खास कदमों के लिए भी मजबूत है, जैसे कि हर किसी को ग्लोबल वार्मिंग की जानकारी देना (93%), नारी और आदिवासी समूहों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सहायता देना (89%), जंगल बचाना (79%) और नए मकानों में पानी और बिजली की बचत करना (76%)।

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जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लोगों का पर्दर्शन भी
सर्वे में इस बात का भी खुलासा किया गया कि 83 प्रतिशत लोग पर्यावरण की खबरें पढ़ते हैं और 81 प्रतिशत परिवार या दोस्तों से इस बारे में बात करते हैं, लेकिन केवल 38 प्रतिशत लोग मीडिया में सप्ताह में कम से कम एक बार ग्लोबल वार्मिंग की खबर सुनते हैं। 16 प्रतिशत लोगों ने पिछले साल जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लिया, और 73 प्रतिशत ऐसे प्रदर्शन में शामिल होने को तैयार हैं अगर कोई भरोसेमंद उनसे कहे। 63 प्रतिशत को गंभीर मौसम की चेतावनी मिलती है, जिसमें टीवी (53%) और परिवार या दोस्तों (51%) की भूमिका प्रमुख है। लेकिन 36 प्रतिशत को कोई चेतावनी नहीं मिलती।

ऐसे में 74 प्रतिशत का कहना है कि गंभीर सूखा आने पर उनके घर को ठीक होने में कई महीने लगेंगे। 64 प्रतिशत ऐसा ही मानते हैं बाढ़ के मामले में। 30 प्रतिशत लोग मौसम से जुड़ी आपदाओं की वजह से घर बदलने पर भी सोच चुके हैं। सिर्फ 16 प्रतिशत के घर में एयर कंडीशनर है और 11 प्रतिशत के पास सोलर पैनल। 35 प्रतिशत लोगों को पिछले साल कम से कम एक दिन साफ पीने का पानी नहीं मिला। आय की बात करें तो आधे से ज्यादा लोग कहते हैं कि उनकी आमदनी उनकी जरूरतें पूरी नहीं करती। 27 प्रतिशत को “कुछ मुश्किलें” आती हैं, और 33 प्रतिशत को बहुत मुश्किलें।

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