महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के तहत लगभग 88 फीसदी मजदूरी भुगतान मई में आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के जरिए किया गया था। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने एक बयान में यह भी कहा कि कुल 14.28 करोड़ सक्रिय लाभार्थियों में से 13.75 करोड़ को आधार को जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि इन वर्गीकृत आधारों के मुकाबले 12.17 करोड़ को प्रमाणित किया जा चुका है और 77.81 फीसदी अब पहले से ही एबीपीएस के लिए पात्र हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मई में वेतन का लगभग 88 फीसदी भुगतान एबीपीएस के माध्यम से किया गया था। मनरेगा के तहत एबीपीएस 2017 से उपयोग में है। मंत्रालय ने कहा, हर वयस्क आबादी के लिए आधार संख्या की लगभग सार्वभौमिक उपलब्धता के बाद अब भारत सरकार ने (रोजगार) योजना के तहत लाभार्थियों के लिए एबीपीएस का विस्तार करने का फैसला किया है। भुगतान केवल एबीपीएस से जुड़े खाते में एबीपीएस के माध्यम से होगा, जिसका अर्थ है कि यह भुगतान हस्तांतरण का एक सुरक्षित और तेज तरीका है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के आंकड़ों से पता चलता है कि 99.55 फीसदी या उससे अधीक की सीमा तक उच्च सफलता प्रतिशत है, जहां प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के लिए आधार सक्षम है। खाता-आधारित भुगतान के मामले में ऐसी सफलता लगभग 98 फीसदी है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के अनुसार, 98 फीसदी से अधिक वयस्कों के पास आधार संख्या है। इसमें कहा गया है कि जिन व्यक्तियों के पास कुछ नहीं है, उन्हें उचित एजेंसियों का दौरा करना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे मनरेगा के तहत लाभार्थियों के साथ शिविर आयोजित करें और 100 फीसदी एबीपीएस प्राप्त करें।