देश के केवल छह राज्यों में 87 हजार स्वास्थ्यकर्मी कोरोना से संक्रमित हैं। ये राज्य हैं- महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और गुजरात। आधिकारिक डाटा दिखाते हैं कि यहां देशभर में कोविड-19 के 73 प्रतिशत मामले सामने आए हैं और संक्रमण के कारण 573 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है। अकेले महाराष्ट्र में इस समय कोरोना के 7.3 लाख पुष्ट मामले हैं।
आंकड़ों के अनुसार राज्य में संक्रमित स्वास्थ्यकर्मियों की लगभग 28 प्रतिशत और कुल मौतों की 50 प्रतिशत संख्या है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु ने 28 अगस्त तक एक लाख से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों का परीक्षण किया था। कर्नाटक में केवल 12,260 संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी हैं जो महाराष्ट्र की तुलना में आधा है। तमिलनाडु में डॉक्टर, नर्स और आशा कार्यकर्ताओं के कोरोना संक्रमण के 11,169 मामले सामने आए। इन तीनों राज्यों में कुल संक्रमित स्वास्थ्य कर्मियों का 55 प्रतिशत हिस्सा है।
इन तीन राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों की सबसे अधिक मौत हुई हैं। महाराष्ट्र में जहां कोविड-19 के कारण 292 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई है। वहीं कर्नाटक और तमिलनाडु में क्रमश: 46 और 49 मौतें हुई हैं। बड़ी संख्या में कोविड-19 संक्रमण और राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों की मौतों को अधिकारियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा चिंता के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि फ्रंटलाइन कर्मियों की जान जोखिम में रहने से भारत की महामारी के खिलाफ लड़ाई पर प्रभाव पड़ सकता है।
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मामलों की अधिक संख्या के बावजूद सरकार को स्वास्थ्यकर्मियों के लिए घोषित 50 लाख रुपये के कोविड-19 बीमा योजना के तहत अप्रैल से अबतक केवल 143 दावे मिले हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मौतों और दावों की संख्या के बीच व्यापक अंतर हो सकता है क्योंकि सभी मृतक योजना के तहत पात्र नहीं हो सकते हैं।
भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य फाउंडेशन में महामारी विज्ञानी गिरिधर बाबू ने कहा, 'स्वास्थ्यकर्मियों के साथ एकजुटता को प्रोत्साहन केवल शब्दों से नहीं बल्कि स्वास्थ्य कार्यबल को मजबूत करने के ठोस प्रयासों से पूरा किया जा सकता है। उनके परिवारों को दो करोड़ रुपये से अधिक का टर्म इंश्योरेंस कवर दिया जाना चाहिए, जिसमें सरकार की गारंटी भी शामिल है।'