भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन को हटाने की मुहिम दिसंबर 2014 से शुरू हो गई थी। जब वित्त मंत्रालय के अधिकारी इस बात से खफा थे आरबीआई के गवर्नर ब्याज दरों को कम करने में रुचि नहीं दिखा रहे थे। सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ भाजपा के कई सांसद भी उनके रवैये से नाराज थे।
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अभी यह बात साफ नहीं हो पाई है कि 3 सितंबर 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक का नया गवर्नर कौन होगा। पर कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो इशारा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल दे सकते हैं। जानिए वो अहम वजह जिसके चलते ऐसा हो सकता है।
1- इन सबके बीच प्रधामनंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई और साफ कर दिया कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी बंद की जाए। बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद पीएम और राजन के बीच बेहतर संबंध स्थापित हुआ है। इस तरह के संकेतों से अनुमान लगाया जा रहा है कि सितंबर में समाप्त हो रहे राजन के कार्यकाल को एक और मौका मिल सकता है।
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2 ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था को राजन अच्छी तरह समझते हैं।
- फोटो : reuters
2- टाइम्स आफ इंडिया के मुताबिक पूर्व वित्त सचिव अरविंद मायाराम का कहना है कि अगर राजन को दूसरे कार्यकाल के लिए हरी झंडी मिलती है तो वे सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेंगे। मायाराम के मुताबिक भारत की 2 ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था को राजन अच्छी तरह समझते हैं। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के मुताबिक निर्णय प्रधानमंत्री मोदी लेंगे लेकिन अन्य नेताओं ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वो क्या करना चाहते हैं।
पीएम राजन की कार्यप्रणाली से खुश हैं- सूत्र
रघुराम राजन
- फोटो : ANI
3- हाल ही में द् वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए गए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा था कि आरबीआई गवर्नर का कार्यकाल सितमबर में पूरा हो रहा है। दूसरी अवधि के लिए उस वक्त फैसला किया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि पीएम मोदी, राजन की कार्यप्रणाली से खुश हैं। उनके खिलाफ चलाए जा रहे किसी भी अभियान का उन पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा। हालांकि इस विवाद पर ना तो पीएमओ और न ही वित्त मंत्रालय की तरफ से कोई टिप्पणी की गई।
विपक्ष का भी मिल सकता है साथ
रघुराम
4- 53 साल के आरबीआई गवर्नर राजन के लिए मोदी का सपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकता है। राजन को बैंकिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर ऋण बकाएदारों का भुगतान करवाना भी एक बड़ी चुनौती है। राजन को हमेशा से ही सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने के लिए जाना जाता है। इस वजह से उन्हें विपक्ष का साथ भी मिल सकता है।
राजन और मोदी के बीच व्यक्तिगत समझ
raghuram rajan and subramanian swamy
5- राजन और मोदी के बीच व्यक्तिगत समझ भी राजन को मोदी के करीब लाती है। हालांकि एक तथ्य यह भी है कि राजन को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है। दूसरा वो शिकागो विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हैं इसलिए लोग उन्हें संदेह के नजरिए से देखते हैं।
राजन को हटाने के लिए भाजपा सांसद और अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी सबसे आगे हैं। हाल ही में उन्होंने राजन पर आरोप लगाया है कि राजन ने जानबूझकर भारतीय अर्थव्यवस्था को गड्ढे में लेकर गए हैं। राजन के असहिष्णुता पर दिए गए बयान के बाद वो भाजपा के कई नेताओं के निशाने पर आ गए थे। स्वामी ने कहा था कि राजन को शिकागो भेज देना चाहिए। उनके रहते भारतीय अर्थव्यवस्था का भला नही होने वाला। तेजी से बढ़ रही भारततीय अर्थव्यवस्था को राजन ने जब 'अंधों में काना राजा' की संज्ञा दी तो वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक तौर पर उनकी जमकर मुखालफत की
थी।
बताया जा रहा है कि राजन अक्सर दिल्ली आकर पीएम से मिलते हैं
रघुराम राजन
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6- हालांकि मोदी ने राजन की तारीफ करते हुए कहा था कि वो एक बेहतर शिक्षक की तरह जटिल मुद्दों को अच्छी तरह आसानी से समझा देते हैं। पीएम से मिली तारीफ का जबाब देते हुए राजन ने कहा था कि यह दोनों तरफ से होना चाहिए।
7- बताया जा रहा है कि राजन अक्सर दिल्ली आकर पीएम से मिलते हैं लेकिन इन मुलाकातों को सार्वजनिक नहीं किया जाता है। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पीएम- वित्त मंत्री जेटली और राजन के आपसी सामंजस्य की वजह से भारत मैक्रो फ्रंट पर बेहतर कर रहा है।
कर्जों के मामले में आरबीआई गवर्नर की रणनीति काफी कारगर रही है
जनता को पसंद आया आरबीआई गर्वनर का काम
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8- राजन के रहते विदेशी निवेश बढ़ा है। इसके अलावा घरेलू मोर्चे पर बैंकों द्वारा दिए गए कर्जों के मामले में आरबीआई गवर्नर की रणनीति काफी कारगर रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री जयंत सिन्हा, राजन के क्लासमेट हैं जो हमेशा उन्हें सपोर्ट करते रहते हैं। जयंत सिन्हा मोदी सरकार में अधिक प्रभावशाली आर्थिक विशेषज्ञों में से एक है।