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75 years of Amar Ujala: नींव के धरातल से उच्च शिखर तक, जानें सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने की पूरी कहानी

Tue, 18 Apr 2023 06:20 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

#AmarUjala75: पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और देश के सामने बड़ी चुनौतियां थीं। इसी दौर में आगरा जैसे विश्व प्रसिद्ध, लेकिन छोटे शहर से निकलने वाला अखबार था- अमर उजाला। उसके सामने भी चुनौतियां कम नहीं थीं। संसाधन सीमित थे और इन्हीं संसाधनों में अमर उजाला को न केवल देश बल्कि विदेश की ताजा खबरें भी अपने पाठकों तक पहुंचानी थीं।
 
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अमर उजाला के 75 साल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वतंत्रता संग्राम के लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। ये नए भारत के निर्माण का दौर था। कभी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ कलम चलाने वाले पत्रकारों पर अब नई जिम्मेदारियां आ गई थीं। इसी क्रम में डोरीलाल अग्रवाल ने अपने मित्र मुरारीलाल माहेश्वरी के साथ मिलकर 18 अप्रैल, 1948 को आगरा में दैनिक अखबार अमर उजाला का प्रकाशन प्रारंभ किया। तब अमर उजाला चार पेज का था। पहले ही दिन प्रथम अंक की 1200 प्रतियां बिक गई थीं। शुरू में अमर उजाला किसी अन्य छापाखाने में छपता था। कुछ दिनों में ही अमर उजाला की तीन हजार से ज्यादा प्रतियां छपने लगीं। बढ़ती प्रसार संख्या के साथ देखते ही देखते अमर उजाला आगरा समेत सम्पूर्ण ब्रज क्षेत्र और राजस्थान के भरतपुर, मुरैना आदि जिलों का प्रमुख समाचार पत्र बन गया।

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40 के दशक के अंतिम वर्ष थे। देश अभी-अभी आजाद हुआ था। संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब आंबेडकर भारत के संविधान को अंतिम रूप दे रहे थे। पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और देश के सामने बड़ी चुनौतियां थीं। इसी दौर में आगरा जैसे विश्व प्रसिद्ध लेकिन छोटे शहर से निकलने वाला अखबार था- अमर उजाला। उसके सामने भी चुनौतियां कम नहीं थीं। संसाधन सीमित थे और इन्हीं संसाधनों में अमर उजाला को न केवल देश बल्कि विदेश की ताजा खबरें भी अपने पाठकों तक पहुंचानी थीं। तब तक आगरा में ऑफसेट मशीन भी नहीं आई थी। आगरा के एक छोटे से किराये के प्रिंटिग प्रेस में टाइप से कंपोज होकर हाथ से छापा जाता था। एक-एक शब्द जोड़ना पड़ता था। पेपरमैन कागज की शीट लगाता था और मशीन मैन कागज निकालता था और कम रोशनी के छापेखाने में बहुत धीमी रफ्तार में हाथ से रातभर अखबार छपते थे। प्रकाशन के अगले ही साल यानी 1949 में अमर उजाला ने अपना राष्ट्रीय स्वरूप बना लिया था। अमर उजाला के प्रतिनिधि देशभर में फैले थे। वे आजादी की लड़ाई में तपे हुए पत्रकार थे।

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