भारत में अब दुनिया के सबसे अधिक 75 फीसदी बाघों का बसेरा है। पिछले दस वर्षों से भी कम समय में भारत ने अपनी बाघों की आबादी को दोगुना कर लिया है। यह उपलब्धि अवैध शिकार पर सख्ती, बाघों के आवास की सुरक्षा, पर्याप्त शिकार सुनिश्चित करने, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के जरिए संभव हो पाई है।
साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार भारत की सफलता अन्य देशों के लिए एक उदाहरण है कि संरक्षण प्रयास न केवल जैव विविधता के लिए बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भी लाभकारी हो सकते हैं। अध्ययन का नेतृत्व कर रहे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, बंगलूरू के वरिष्ठ वैज्ञानिक यदवेंद्र देव झाला का कहना है कि आम धारणा के विपरीत मानव घनत्व बाघों की संख्या बढ़ाने में बाधक नहीं है, बल्कि यह लोगों के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
अध्ययन में इस बात पर जोर
अध्ययन में कहा गया कि संरक्षण के प्रयास तभी सफल होंगे जब स्थानीय समुदायों को इसका हिस्सा बनाया जाएगा और उन्हें इसके लाभ भी मिलें। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को बाघों के साथ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) और कैराकल जैसी अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण पर भी ध्यान देना चाहिए।
3682 हुए बाघ
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अनुसार 2010 में बाघों की संख्या 1,706 थी, जो 2022 में बढ़कर 3,682 हो गई है। इस बढ़ोतरी से भारत में वैश्विक बाघ आबादी का तीन-चौथाई हिस्सा हो गया है। बता दें कि भारत में लगभग 1.38 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं बाघ, 25% क्षेत्र ही पूरी तरह से संरक्षित है।