सर्वे के मुताबिक नौकरियों की कमी के बावजूद हर महीने 13 लाख युवा कार्यक्षेत्र में शामिल हो रहे हैं। लेकिन केवल एक चौथाई युवाओं ने ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में रजिस्ट्रेशन कराया। वहीं 76 फीसदी युवाओं ने कौशल विकास ट्रेनिंग में अपनी रूचि दिखाई।
स्टडी के मुताबिक 49 फीसदी युवाओं का कहना था कि वे सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरी करना पसंद करेंगे। वहीं केवल 38 प्रतिशत युवाओं ने ही व्यवसाय को लेकर रूचि दिखाई। स्टडी के मुताबिक युवाओं का कहना था कि नौकरी करने से पहले वे अच्छी सेलरी, प्रमोशन और करियर में आगे बढ़ने की संभावनाएं जैसे फैक्टर्स को प्राथमिकता देते हैं।
स्टडी में यह बात सामने निकल कर आई कि 82 फीसदी युवातियों ने फुल-टाइम जॉब के प्रति अपनी रूचि दिखाई। वहीं सर्वे में शामिल 19 प्रतिशत महिलाओं ने कौशल विकास कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छा जताई। जबकि तीन-चौथाई महिलाओं को सरकार की कौशल विकास कार्यक्रम के बारे में जानकारी ही नहीं है। वहीं आधी महिलाओं का कहना था कि उनके पास योजना में शामिल होने का वक्त ही नहीं है।
सर्वे के मुताबिक देश के 51 फीसदी युवाओं का कहना था कि मार्गदर्शन की कमी के चलते उन्हें अपने स्किल के मुताबिक नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। 49 फीसदी युवाओं का मानना है कि इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने से उन्हें मार्गदर्शन में मदद मिलेगी। जबकि 41 फीसदी युवाओं का कहना था कि अनुभव की कमी नौकरी ढूंढने में सबसे बड़ा रोड़ा है।
सर्वे की खास बात यह रही कि डिजिटाइजेशन होने के बावजूद एंप्लॉयर्स और रिक्रूटर्स अभी भी ऑनलाइन नहीं हुए हैं। 81 फीसदी युवा अभी भी नौकरी से जुड़े मामलों पर मीडिया और इंटरनेट पर भरोसा करते हैं। वहीं केवल 14 फीसदी कंपनियां ही ऑनलाइन माध्यमों के जरिए रिक्रूटमेंट कर रही हैं।