गौरतलब है कि मोदी सरकार देशभर के 125 जिलों में तीन जनवरी को कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन कर चुकी है। इस दौरान एंड-टु-एंड मॉक ड्रिल किया गया। हालांकि, इस दौरान काफी लोगों ने कोरोना का टीका लगवाने से हिचकिचाहट भी जाहिर की, जिसके लिए उन्होंने कई तरह की चिंता जताई। बता दें कि इस सर्वे के दौरान देश के 224 जिलों में बसने वाले लोगों की करीब 18 हजार से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं। जवाब देने वालों में 69% पुरुष थे, जबकि 31 फीसदी महिलाओं ने भी सर्वे में हिस्सा लिया। वहीं, 51 फीसदी लोग टियर 1 शहरों से, 31 फीसदी लोग टियर 2 शहरों से और 18 फीसदी लोग टियर 3-4 के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों से थे।
बता दें कि अब तक फाइजर-बायोएनटेक, ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका और मॉडर्ना इंक की वैक्सीन फ्रंट रनर के रूप में सामने आई हैं। इस बीच भारत सरकार ने देसी वैक्सीन कोवैक्सीन और कोविशील्ड को भी हरी झंडी दे दी है। हालांकि, लोगों को फाइजर, एस्ट्राजेनेका और मॉडर्ना की वैक्सीन पर ज्यादा भरोसा है। सर्वे के मुताबिक, 61 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन का ही इस्तेमाल करे।
अब हम आपको बताते हैं कि कोरोना वैक्सीन लगवाने से आखिर लोग हिचकिचा क्यों रहे हैं? लोकल सर्वे नामक कंपनी की ओर से किए गए इस सर्वेक्षण के मुताबिक, अब तक 69 प्रतिशत लोग कोरोना वैक्सीन लगवाने से इनकार कर चुके हैं। दिसंबर 2020 के बाद ऐसे लोगों से जब जनवरी 2021 में बात की गई तो भी उन्होंने अपनी राय नहीं बदली। उनका कहना है कि वे वैक्सीन के दुष्परिणाम यानी साइड इफेक्ट को लेकर ज्यादा परेशान हैं। इसके अलावा भारत जैसे देश में जनसंख्या, बुनियादी ढांचा, आपूर्ति, वितरण के अलावा भंडारण और सामर्थ्य आदि मसलों को लेकर भी वे अभी वैक्सीन लगवाने के पक्ष में नहीं हैं।
गौरतलब है कि ड्रग कंट्रोलर ने 12 साल से ऊपर के बच्चों को दवा देने के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को ग्रीन सिग्नल दिया है। इस मुद्दे पर जब सर्वे किया गया तो सिर्फ 26 प्रतिशत लोगों ने ही अपने बच्चों को कोविड-19 वैक्सीन लगवाने की इच्छा जाहिर की। वहीं, 56 फीसदी अभिभावकों का कहना था कि वे करीब तीन महीने तक वैक्सीन के आंकड़े और परिणाम देखने के बाद ही विचार करेंगे। इनके अलावा 12 फीसदी लोगों ने अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाने से साफ इनकार कर दिया।
सर्वे कंपनी ने लोगों से पूछा कि देश में कोविड-19 टीकाकरण शुरू होने वाला है। ऐसे में वैक्सीनेशन को लेकर आपकी क्या राय है? कंपनी ने सामने आठ विकल्प रखे।
- मैं एक स्वास्थ्यकर्मी या फ्रंटलाइन कार्यकर्ता हूं और सरकार के माध्यम से इसे प्राथमिकता पर पाऊंगा।
- वैक्सीन प्राप्त करने के लिए तीन से छह महीने इंतजार करेंगे।
- टीका लगवाने के लिए 6 से 12 महीने तक इंतजार करेंगे।
- साल 2022 में ही टीका लगवाएंगे।
- टीकाकरण नहीं कराएंगे।
- निजी हेल्थकेयर चैनलों के माध्यम से उपलब्ध होते ही टीका लगवा लेंगे।
- किसी भी हेल्थ केयर चैनल के माध्यम से उपलब्ध होते ही टीका प्राप्त कर लेंगे।
- अभी कुछ नहीं कह सकते।