नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 38 में 25 कीड़ों की प्रजातियों में विलुप्त होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण उनके स्थानीय वातावरण के तापमान में आकस्मिक बदलाव है।
जलवायु परिवर्तन के कारण इस सदी के अंत तक दुनिया के 65 फीसदी कीड़े विलुप्त हो जाएंगे। हालिया अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए भी संकट की स्थिति आएगी।
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नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 38 में 25 कीड़ों की प्रजातियों में विलुप्त होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण उनके स्थानीय वातावरण के तापमान में आकस्मिक बदलाव है। अध्ययन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण ऊष्मीय दबाव जानवरों की जनसंख्या को अस्थिर कर सकता है। इससे उनके विलुप्त होने का जोखिम बढ़ गया है।
तापमान की विविधता का असर
शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्हें एक प्रतिमान उपकरण की जरूरत थी, जिससे वे समझ सकें कि कीड़ों की जनसंख्या कैसे तापमान की विविधता से प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि जलवायु परिवर्तन जैवविविधता पर लंबे समय तक नकारात्मक असर डालेगी।