जहां एक तरफ मुज्जफरपुर और देवरिया जैसी घटनाओं ने पूरे देश को शर्मसार किया है। वहीं अब एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। बता दें कि पिछले पांच साल में 61 फीसदी दुष्कर्म बढ़े हैं। शर्म की बात यह है कि इनमें नाबालिगों से जुड़े मामलों में 133 फिसदी इजाफा हुआ है। हर रोज 46 नाबालिग बच्चियां दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 के बाद पांच साल में दुष्कर्म के कुल मामले 61 फीसदी बढ़ गए हैं। 2011 में नाबालिगों से दुष्कर्म के 7228 मामले सामने आए थे, जबकि 2016 में ऐसे 16863 मामले दर्ज हुए। इससे पता चलता है कि देश में रोजाना ही औसतन 46 से ज्यादा नाबालिग दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। हाल ही में मुजफ्फरपुर की घटना पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज मदन बी लोकुर ने कहा कि दुष्कर्म की सबसे ज्यादा घटनाएं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में हो रही हैं।
जबकि सिर्फ नाबालिगों से दुष्कर्म के मामले देखें तो दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र आता है। यही नहीं 12 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले भी महाराष्ट्र में ही देखे जा रहे हैं। हालांकि छोटी बच्चियों के लिए सबसे असुरक्षित राज्य में केरल भी शीर्ष पांच में शामिल है। देश की विभिन्न अदालतों में 2016 में दुष्कर्म के जिन मामलों की सुनवाई हुई, उनमें से 18.9 फीसदी मामलों में ही आरोपियों को सजा हुई।
लगातार बढ़ते दुष्कर्म के मामलों को देखते हुए बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी मिली है। 2016 में महाराष्ट्र इनमें शीर्ष पर था। तब यहां 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के सबसे ज्यादा 348 मामले दर्ज हुए थे।
दूसरे स्थान पर 327 मामलों के साथ उत्तरप्रदेश, तीसरे पर 192 मामलों के साथ मध्यप्रदेश, चौथे पर केरल और पांचवें पर दिल्ली है। केरल में 2016 में 188 तथा दिल्ली में 171 मामले दर्ज किए गए। वैसे सभी उम्र वर्ग की महिलाओं द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामलों को जोड़कर देखें तो केरल का स्थान राज्यों की सूची में 7वां है।