कहते हैं डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, लेकिन भारतीय डॉक्टरों के मामले में इस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनके हाथों में आपकी जान सुरक्षित नहीं है। इनसे अपने रोग का इलाज कराना खतरे से खाली नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट ने भारतीय डॉक्टरों की कलई खोलकर रख दी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 57.3 प्रतिशत डॉक्टरों के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है, जबकि 31.4 फीसदी डॉक्टर दसवीं तक पढ़े हैं। वही ग्राणीण इलाकों में स्थिति और खराब है।
अब आप सोचिए कि दसवीं पास डॉक्टर से इलाज कराना कितना सुरक्षित है। बिना पढ़े लिखे और झोला झाप डॉक्टरों से इलाज कराना आपको महंगा पड़ सकता है। यहां पढ़िए विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट के अहम प्वाइंट्स -
1. विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह रिपोर्ट 2001 में हुई जनगणना पर आधारित है। इसके मुताबिक देश में 20 लाख स्वास्थ्य कर्मी है। इनमें 39.6 प्रतिशत डॉक्टर हैं, 30.5 प्रतिशत नर्से और मिडवाइव्स हैं, जबकि केवल 1.2 प्रतिशत डेंटिस्ट हैं।
2. 36.6 प्रतिशत डॉक्टरों में 77.2 प्रतिशत एलोपैथिक डॉक्टर हैं और 22.8 प्रतिशत आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक या यूनानी है। स्वास्थ्य कर्मियों की दूसरी कैटेगरी फार्मासिस्टों, असिस्टेंट हेल्थ प्रोफेशनल्स और पारंपरिक स्वास्थ्य कर्मी हैं। इनकी संख्या कुल स्वास्थ्य कर्मियों का 28.8 प्रतिशत है।
3. चौंकाने वाली बात ये है कि 31.4 प्रतिशत डॉक्टर केवल दसवीं पास हैं और 57.3 प्रतिशत के पास कोई मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है। नर्सों और मिडवाइव्स में 67.1 प्रतिशत ने केवल दसवीं तक पढ़ाई की है।
4. देश के 73 जिलों में किसी भी नर्स के पास मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है।
5. सभी स्वास्थ्य कर्मियों में 59.2 प्रतिशत शहरी इलाकों में है और 40.8 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में हैं।
6. शहरी इलाकों के डॉक्टरों की शैक्षिक योग्यता ग्रामीण इलाके के डॉक्टरों से बहुत ज्यादा है। शहरों के 83.4 प्रतिशत एलौपैथिक डॉक्टर दसवीं से ज्यादा पढ़े हैं, जबकि गांवों में 45.9 प्रतिशत दसवीं से ज्यादा पढ़े हैं।
7. शहरी-ग्रामीण के बीच का अंतर ही इस रिपोर्ट का मुख्य अंश है। देश के 30 जिलों में एलौपैथिक डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है और इनमें आधे से ज्यादा नॉर्थ ईस्ट के राज्य है। इसके बाद केंद्रीय राज्यों का नंबर है - इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, और मध्य प्रदेश शामिल हैं। वहीं 30 जिलों में एलौपैथिक डॉक्टरों की संख्या सबसे ज्यादा है और इनमें आधे से ज्यादा दिल्ली में हैं। इसमें दिल्ली के सातों जिले शामिल हैं।
8. नर्सों के मामले में भी यही हालत है। इनकी संख्या बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में बेहद कम है और राज्य और देश की राजधानी में स्थिति सबसे बेहतर है। केरल के सात जिले सबसे ज्यादा नर्सों की संख्या वाले 30 जिलों में शामिल हैं।
9. मेडिकल क्वालिफिकेशन के मामले में यह गैप और ज्यादा है। 58.4 प्रतिशत शहरी एलौपैथिक डॉक्टर उपयुक्त रूप से शिक्षित है, जबकि 18.8 प्रतिशत ग्रामीण एलौपैथिक डॉक्टरों के पास मेडिकल क्वालिफिकेशन हैं।
10. इस अध्ययन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में लिंग आधारित गैप को भी दिखाया है। सभी स्वास्थ्य कर्मियों में 38 प्रतिशत फीमेल हैं। इनमें से सबसे ज्यादा महिला स्वास्थ्य कर्मी केरल (64.5 प्रतिशत) और मेघालय (64.2 प्रतिशत) में, जबकि सबसे कम महिला स्वास्थ्य कर्मी उत्तर प्रदेश (19.9 प्रतिशत) और बिहार (22.3 प्रतिशत) में हैं।
11. हालांकि डॉक्टरों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है लेकिन वे महिला डॉक्टरों से कम पढ़े लिखे हैं। एलौपैथिक डॉक्टरों में केवल 37.7 प्रतिशत मेडिकल क्वालिफाइड हैं अपने समकक्ष 67.2 प्रतिशत महिला डॉक्टरों के मुकाबले।
12. कुछ राज्यों में आयुष डॉक्टरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इनमें त्रिपुरा (41.7 प्रतिशत), ओड़िशा (40.5 प्रतिशत) और केरल (38.1 प्रतिशत) शामिल हैं।
13. अध्ययन में यह सामने आया है कि भारत में सामान्य रूप से डेंटल हेल्थकेयर की कमी है। देश के 593 जिलों में 58 जिलों में कोई डेंटिस्ट नहीं है, जबकि 88 जिलों में डेंटिस्ट दसवीं से ज्यादा नहीं पढ़े हैं। 175 जिलों में डेंटिस्ट्स के पास कोई मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है।