11 घंटे 4 मिनट तक जिंदगी मौत के बीच 40 जाने फंसी रहीं और गांव के पांच युवक इनके लिए भगवान साबित हुए। झरने में पानी बढ़ने का खतरा फिर बढ़ रहा था जिसके वजह से प्रशासन की कोई टीम पानी में उतर नहीं पा रही थी। लेकिन गांव के बहादुर -निजाम खान,रामसेवक,भागीरथ ,कल्लन और देवेंद्र सिंह ने मिलकर एक-दूसरे की मदद से 33 लोगों को बाहर निकाल लिया।
बलराम भागीरथ और निजाम ने बताया कि मुझे झरने के अंदर की चट्टानों की जानकारी थी। फिर हमने कुछ देर ओर प्रशासन की टीम का इंतजार किया, लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ा तो हम लोग ही पानी में पहुंच गए। प्रशासन का बचाव अभियान सुस्त पड़ता जा रहा था। प्रशासन हमें रोक रहा था हम उनसे दूर जाकर कम पानी वाली चट्टानों पर पैर जमाते हुए आगे बढ़े और लोगो को बचा लाए।
ये युवक पहले भी यहां लोगों की जान बचा चुके हैं।ऐसी खतरनाक स्थिति में ये कैसे ये कारनामा कर गये? ये पूछने पर इन्होने बताया 'हमने रस्से का सहारा लिया। रस्सा आगे फेंकते हुए आगे बढ़ते गए और चट्टान पर फंसे लोगों को रस्से के सहारे बाहर निकालते गए।'
देवेंद्र सिंह ने बताया कि जब पानी का बहाव कुछ तेज होता लगा तो अफसरों को बताए बिना पहले डाले गए रस्सों के सहारे चट्टान पर फंसे लोगों तक पहुंच गए और उन्हें बाहर निकाल लाए।