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49 दिन की सरकार में किया ये वादा भूल गई केजरीवाल सरकार

Thu, 04 Aug 2016 04:51 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : file photo
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देश को भृष्टाचार मुक्त करने के लिए आंदोलन से सत्ता के गलियारे में आए केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने जैसे पलकों पर बैठा लिया और पहले चुनाव में ही दिल्ली का सीएम बना दिया, हालांकि कांग्रेस के समर्थन से बनी सरकार महज 49 दिनों तक ही चल सकी, लेकिन उन 49 दिनों में केजरीवाल सरकार ने दिल्ली की जनता से बहुत से वादे किए, जिनमें दिल्ली के छात्रों से जुड़ा यह भी एक अहम वादा था। उस वादे की हकीकत अब आरटीआई के जरिए सामने आई है। 
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दरअसल, दिल्ली में सरकार के पहली पारी खेलने वाली केजरीवाल सरकार ने छात्रों से वादा किया था कि दिल्ली परिवहन यानी डीटीसी की बसों में उन्हें किराया नहीं चुकाना पड़ेगा। तब सरकार के शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसौदिया ने कहा था कि उन्होंने इस बाबत डीटीसी को आदेश भी भेज दिया है। 

लेकिन पिछले महीने डीटीसी ने आरटीआई याचिकाकर्ता को जवाब दिया कि अब तक दिल्ली सरकार की तरफ ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है।

आजतक डीटीसी को दिल्ली सरकार से नहीं मिला कोई आदेश

- फोटो : file photo
2014 में सिसौदिया ने कहा था कि हम सभी छात्रों को डीसीटी बसों में मुफ्त में यात्रा करने के लिए पास देंगे। उन्होंने कहा था कि कुछ छात्र उनके दफ्तर में आए थे और उन्होंने ऐसा करने के लिए निवेदन किया था। इसलिए सरकार ने फैसला किया है कि वह छात्रों का बसों से आने-जाने खर्च वहन करेगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र और आरटीआई कार्यकर्ता 27 वर्षीय अनिकेत गौरव ने यह जानकारी डीटीसी से मांगी थी। डीटीसी ने इस सिलसिले में सरकार से कोई भी आदेश मिलने से साफ इनकार कर दिया।

डीटीसी पत्राचार के माध्यम से दिल्ली के शिक्षा विभाग से हुई बातचीत का ब्यौरा भी मांगा गया, जिसके जवाब में भी डीटीसी ने हाथ खड़े कर दिए।

मामले पर जवाब देने से बच रही दिल्ली सरकार

- फोटो : file photo
मौजूदा वक्त में डीटीसी छात्रों को नॉन एसी बसों 150 रुपए तक की मासिक रियायत उपलब्ध कराती है। वहीं, विकलांग छात्रों से कोई किराया नहीं लिया जाता है। मुफ्त वाली सुविधा में स्वतंत्रता सेनानी, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, सैनिकों की विधवाएं, दिल्ली के विधायक और सांसद शामिल हैं।

मीडिया ने जब सिसौदिया से 2014 में उनके दिए आदेश के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। सरकार के मीडिया इंचार्ज नागेंद्र शर्मा ने कहा ''दिल्ली में साल भर तक कोई सरकार नहीं थी, हो सकता है कि आदेश का पालन नहीं किया गया हो।''

डीटीसी के पब्लिक रिलोशन अधिकारी आरएस मिनहास ने कहा, ''अगर आरटीआई से पता चला है कि सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया, तो कुछ भी कहने की जरूरत ही नहीं।''
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विधायकों-सांसदों को फ्री पास, छात्रों को क्यों नहीं?

- फोटो : demo
डीटीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अज की तारीख तक डीटीसी को सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है जिसमें कहा गया हो कि छात्रों को मुफ्त में पास उपलब्ध कराने हों।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिकेत ने बताया कि वह भी उन छात्रों में शामिल था जिन्हें डीटीसी बसों में फ्री पास की सुविधा मिलती, लेकिन ऐसा न होने से छात्रों को निराशा हुई है।

अनिकेच ने कहा कि मोटी तनख्वाह उठाने वाले विधायकों और सांसदों को डीटीसी फ्री पास मुहैया करा सकता है, लेकिन उन छात्रों को नहीं।
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