असम और बिहार में बाढ़ की तबाही भयावह होती जा रही है। दोनों राज्यों में मिलाकर बाढ़ से अब तक 408 लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार के दरभंगा जिले के बहेरी में जीबछ नदी का बांध टूटने से कई गांव डूब गये। जिन इलाकों में पानी घटा है वहां राहत को लेकर लोग सडकों पर उतर आये हैं। बेतिया और पूर्णिया में पिछले 24 घंटों में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
सरकारी दावों के अनुसार अब तक 225 लोगों की मौत हुई है, लेकिन सूत्रों की माने तो यह आंकडा 250 के करीब पहुंच चुका है। 16 प्रभावित जिलों में राहत और बचाव का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद बाढ़ की समीक्षा और निगरानी की। मुख्यमंत्री ने मोतिहारी और उसके आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है।
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गौरतलब है कि बाढ़ से बिहार के 18 जिलों की 1.21 करोड़ आबादी प्रभावित हुई है। बाढ़ का से दरभंगा-समस्तीपुर रेल खंड पर ट्रेन का परिचालन पूरी तरह से ठप्प हो गया है। इलाके के हायाघाट-थलवारा के बीच पुल संख्या 16 पर पर बाढ़ के पानी का दबाब लगातार बढ़ रहा है इस कारण दरभंगा एवं जयनगर से खुलने वाली कई ट्रेनों को समस्तीपुर एवं मुजफ्फरपुर से परिचालित किया जा रहा है।
वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर के बाढ़ग्रस्त राज्य असम में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान चार और लोगों की मौत के साथ राज्य में बाढ़ से मरने वालों की तादाद 158 हो गई है। इसबीच, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने कहा है कि 28 अगस्त से पहले इलाके में ट्रेनों का संचालन संभव नहीं है। रेलवे के प्रवक्ता के मुताबिक, अगर हालात और नहीं बिगड़े तो 28 अगस्त तक देश के बाकी हिस्सों से रेल सेवा बहाल की जा सकती है।
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राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि फिलहाल मोरीगांव जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वहां पांच लाख लोग इसकी चपेट में हैं। सूत्रों ने बताया कि बाढ़ से राज्य में सात हजार स्कूलों को भी नुकसान पहुंचा है। इससे पढ़ाई-लिखाई ठप है और छत्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। 1700 स्कूलों को राहत शिविरों में बदल दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न जिलों में खोले गए 328 राहत शिविरों में अब भी 68 हजार लोग रह रहे हैं। इसके अलावा सेना व आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कर्मचारियों की सहायता से प्रभावित इलाकों से 52 हजार लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ के ताजाज दौर में लगभग चार लाख हेक्टेयर खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं।