केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने भारत और ईरान में चाबहार बंदरगाह के बीच माल के परिवहन पर मौजूदा 40 फीसदी छूट को एक साल के लिए बढ़ाने का निर्णय किया है। इस कदम का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है।
पोत परिवहन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह और दीनदयाल बंदरगाह से लेकर ईरान में चाबहार के शाहिद बेहिश्ती बंदरगाह के बीच माल परिवहन तथा माल वाहक जहाजों से संबंधित शुल्कों की वर्तमान रियायती दर में 40 प्रतिशत की छूट एक वर्ष के लिए बढ़ा दी गई है।
छूट को आनुपातिक तौर पर लागू किया जाएगा
रियायती पोत संबंधित शुल्क (वीआरसी) की छूट को आनुपातिक तौर पर लागू किया जाएगा। यह शाहिद बेहिश्ती बंदरगाह के लिए भेजे गए माल के कम से कम 50 टीईयू (बीस फुट के बराबर इकाई) या 5,000 टन माल भार पर निर्भर करेगा।
छूट का उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना
इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के साथ समन्वय में ये बंदरगाह संयुक्त रूप से एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल पर वास्तव में पोत से उतारे गए या पोत पर चढ़ाए गए कार्गो को छूट प्रदान की जा रही है। इस छूट अवधि के विस्तार का उद्देश्य ईरान के चाबहार में शाहिद बेहिश्ती बंदरगाह के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा देना है। साथ ही यह जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तथा दीनदयाल बंदरगाह से शाहिद बेहिश्ती बंदरगाह के मालवाहक जहाजों के तटीय आवागमन को भी प्रोत्साहन देगा।
बता दें कि ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी-पूर्वी समुद्री किनारे पर बना है। यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी समुद्री तट से ईरान के दक्षिणी समुद्र तट को जोड़ता है। ईरान ने चाबहार बंदरगाह को व्यापार मुक्त क्षेत्र घोषित किया है। ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास है, जो यूएई और ओमान के बेहद नजदीक है। इस बंदरगाह से मध्य पूर्वी देश विभिन्न देशों को तेल की सप्लाई करते हैं। ईरान के पास अपना स्वायत और स्वतंत्र बंदरगाह नहीं है। इस कमी को पूरा करने का सारा दायित्व चाबहार के ऊपर है।