दुनिया भर में लोकप्रिय हो चीन के वीडियो शेयरिंग एप टिकटॉक पर अमेरिका में करीब 40 करोड़ रुपये (57 लाख डॉलर) का रिकॉर्ड जुर्माना लगा है। कंपनी मामले को निपटाने के लिए राशि देने पर सहमत हो गई है। एफटीसी के साथ हुए समझौते के तहत कंपनी को 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सभी विडियो डिलीट करने होंगे। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने बुधवार को बताया कि एप ने गैरकानूनी तरीके से 13 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़े डाटा को एकत्रित किया है।
आयोग के अनुसार चाइल्ड प्राइवेसी के मामले में यह रिकॉर्ड जुर्माना है। अमेरिका की तरफ से यह जुर्माना वीडियो शेयरिंग एप म्यूजिक.एलवाई पर लगाया है, जिसका पिछले साल अगस्त में टिकटॉक में विलय हो गया था। कंपनी पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, ई-मेल एड्रेस और उनकी लोकेशन जैसी एकत्रित की।
एफटीसी ने कहा कि जांच में सामने आया था कि पेरेंट्स की शिकायतों के बावजूद कंपनी ने बच्चों से जुड़ी सूचनाओं को डिलीट करने के आग्रह का पूरा नहीं किया। मालूम हो कि टिकटॉक, 75 अरब डॉलर के स्टार्टअप बाइटडांस से जुड़ा है। दुनिया भर में इसके कई करोड़ यूजर्स हैं। हाल के समय में टिकटॉक ने चीन की अन्य घरेलू सोशल मीडिया कंपनियों की तुलना में तेजी चीन से बाहर अन्य देशों में तेजी से वृद्धि की है।
पेरेंट्स की जानकारी के बिना बनाए गए अकाउंट्स
2014 में शुरू किए गए एप म्यूजिकल.एलवाई ने लोकप्रिय गीतों पर लिप्सिंग करने वाले शॉर्ट वीडियो को अपलोड करने की सुविधा दी थी। बच्चों के अधिकतर अकाउंट्स उनके पेरेंट्स की जानकारी के बिना बनाए गए थे। इस एप पर रजिस्टर करने के लिए लोगों को अपना ई-मेल एड्रेस, फोन नंबर, यूजरनेम, पहला और अंतिम नाम, संक्षिप्त जानकारी और प्रोफाइल तस्वीर देनी होती थी। टिकटॉक में विलय से पहले अमेरिका में इसके 6.5 लाख यूजर्स थे।
अमेरिका में चाइल्ड प्राइवेसी मामलों में इन पर भी लगा जुर्माना
अमेरिका में चाइल्ड प्राइवेसी के मामले में टिकटॉक से पहले अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियों पर भी जुर्माना लग चुका है। वेरिजन के स्वामित्व वाली कंपनी पर पिछले साल दिसंबर में 50 लाख डॉलर का जुर्माना लगा था। कंपनी पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर केंद्रित ऑनलाइन विज्ञापन के लिए उनकी कुकीज और जियो लोकेशन डाटा का प्रयोग करने का आरोप था। डिज्नी की सहायक प्लेडॉम पर साल 2011 में ऑनलाइन गेम्स के लिए बच्चों से जुड़ी सूचना एकत्रित करने के मामले में 30 लाख जुर्माना लगा था।