वैक्सीनेशन सेंटर में टीका लगवाती युवती।
- फोटो : Amar Ujala (File)
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविन पोर्टल के मुताबिक गुरुवार तक 41.68 करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लगाया गया। लेकिन इसी पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार तक 40.78 करोड़ लोगों ने अपना पंजीकरण कराया था। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये 90 लाख लोग हैं कौन, जिन लोगों ने बगैर पंजीकरण के टीका भी लगवा लिया और पंजीकरण भी नहीं कराया। फिलहाल जिम्मेदार महकमा इस मामले की जांच कर रहा है कि आखिर ये हुआ कैसे।
देश में टीकाकरण की पूरी जानकारी कोविन पोर्टल पर रहती है। बीते कुछ सप्ताह से इस पोर्टल पर दर्ज जानकारी से लगातार भ्रम बना हुआ है। टीका लगवाने वाले और अपना पंजीकरण कराने वालों की संख्या में काफी अंतर दिख रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ऐसा संभव नहीं है कि 90 लाख लोगों की पूरी जानकारी गलत दर्ज हो जाए। फिर भी इसको चेक करवाया जाएगा।
सवाल यह भी है...
एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर मान भी लिया जाए कि इन 90 लाख लोगों की संख्या वॉक इन वैक्सीनेशन लगवाने वालों की है, और इन लोगों ने अपना पंजीकरण नहीं करवाया तो भी बात गले से नीचे नहीं उतरती। विशेषज्ञों का कहना है कि जब वॉक इन टीका लगाया जाता है तो टीका लगाने से पहले भी एक पंजीकरण होता है। इसके अलावा टीका लगने के साथ ही पंजीकरण भी होता है। बगैर पंजीकरण के टीके की डिटेल्स मोबाइल पर नहीं आ सकती। इसलिए यह जांच का विषय है।
पूरे देश में टीकाकरण अभियान पर नजर रखने वाली कमेटी के प्रमुख डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि शुक्रवार तक हर हाल में जांच करवाने के बाद अपडेट दिया जाएगा कि आखिर ये 90 लाख की संख्या क्यों नहीं मिल रही है। उनका कहना है कुछ तकनीकी खामी या वॉक इन वैक्सीनेशन की वजह से ऐसा हुआ होगा। एक बार जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि ऐसा कैसे हुआ।