फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तरी ओडिशा में बाढ़ का कहर: 373 गांव डूबे; राहत-बचाव के बीच घटने लगा नदियों का जलस्तर

Thu, 03 Sep 2026 03:40 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, भुवनेश्वर

सार

ओडिशा प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को उत्तरी ओडिशा में बाढ़ के हालात गंभीर बने रहे। हालांकि, बालासोर, जाजपुर और मयूरभंज जिलों के कुछ हिस्सों में जलभराव के बाद अब प्रमुख नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है।
विज्ञापन
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तरी ओडिशा में बाढ़ से बालासोर, जाजपुर और मयूरभंज सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां 373 गांवों में पानी भर गया है। हालांकि प्रमुख नदियों का जलस्तर अब घट रहा है, प्रशासन ने 47 बचाव टीमें तैनात कर राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। वहीं, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में कुछ जिलों में आंधी-तूफान और तेज हवाओं की संभावना जताई है। 

विज्ञापन


सुवर्णरेखा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
सुवर्णरेखा नदी ने बालासोर जिले के पांच ब्लॉकों भोगराई, बालियापाल, बस्ता, रेमुना और जलेश्वर के 214 गांवों को जलमग्न कर दिया था। नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, हालांकि उसका जलस्तर अब घट रहा है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत ने कहा कि दोपहर तक राजघाट पर सुवर्णरेखा का जलस्तर 10.84 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 10.36 मीटर है। अभी जलस्तर घट रहा है, जो नदी की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार का संकेत है। अधिकारी ने बताया कि बालासोर जिले के प्रभावित गांवों से करीब 35,740 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इन लोगों को 72 राहत शिविरों में रखा गया है।

जाजपुर में 62 गांव जलमग्न
बैतरणी नदी और उसकी सहायक नदियों, जिनमें सालंदी और बुढ़ाबलंगा शामिल हैं, में आई बाढ़ के कारण जाजपुर और मयूरभंज जिलों में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि जाजपुर में दशरथपुर ब्लॉक के 62 गांव जलमग्न हैं। कुल 22 राहत शिविर चल रहे हैं, जिनसे 7,745 लोगों को मदद मिल रही है।  मयूरभंज में 97 गांवों और बारीपदा नगर पालिका के दो वार्डों के लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। जिले में कुल 29 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जहां 10,501 लोगों को आश्रय दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 104 घरों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। प्रभावित लोगों के बीच नौ पॉलीथीन रोल भी बांटे गए हैं।
विज्ञापन


कई प्रमुख नदियों का जलस्तर घटा
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गुरुवार सुबह कई अन्य नदियों का जलस्तर भी घट रहा था। इनमें नारज में महानदी, सुंदरगढ़ में इब, पानपोष में ब्राह्मणी, आनंदपुर और अखुआपदा में बैतरणी, एनएच-5 पर बुढ़ाबलंगा, गुनुपुर में वंशधारा और मथानी में जलका शामिल हैं। हीराकुंड जलाशय के अधिकारी चार स्लुइस गेट के जरिए महानदी में अतिरिक्त पानी छोड़ रहे हैं। जलाशय का जलस्तर 627.29 फीट है, जबकि इसकी पूरी क्षमता (FRL) 630 फीट है।

47 बचाव टीमें मोर्चे पर
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 47 बचाव टीमें तैनात की हैं। इनमें ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की 21 टीमें, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की चार टीमें और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की 22 टीमें शामिल हैं।

जाजपुर, मयूरभंज और बालासोर में विशेष तैनाती
जाजपुर में ODRAF की तीन टीमें तैनात हैं, जबकि मयूरभंज में ODRAF की छह और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की 13 टीमें तैनात की गई हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल बालासोर में बचाव और राहत कार्यों के लिए ODRAF की 12, NDRF की चार और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की नौ टीमें तैनात की गई हैं।

अगले 24 घंटे में मौसम पर नजर
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे सटे इलाकों में बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ सकता है। इसके दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तरी मध्य प्रदेश से होकर गुजरने की संभावना है।

आठ जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट
IMD ने बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, क्योंझर और मयूरभंज जिलों में एक-दो स्थानों पर बिजली चमकने और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ आंधी-तूफान की संभावना जताई है।

प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन से कहा है कि वे स्थानीय स्तर पर बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव, अंडरपास बंद होने तथा सड़कों और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहें। अधिकारियों को भारी बारिश या बाढ़ के कारण बागवानी और खड़ी फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर भी सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य होने तक राहत और सहायता कार्य जारी रहेंगे। स्पेशल रिलीफ कमिश्नर के कार्यालय के तहत राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र, सभी जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रख रहा है।

ये भी पढ़ें: तेलंगाना: कोंडा सुरेखा की कैबिनेट से छुट्टी, सीएम रेवंत रेड्डी के खिलाफ टिप्पणी का मामला
विज्ञापन


सरकार ने पूरी तैयारी बनाए रखी
स्पेशल रिलीफ कमिश्नर राजेश पी. पाटिल ने कहा कि नदियों की स्थिति में सुधार और बारिश में कमी अच्छे संकेत हैं।" हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तैयारी बनाए हुए है। प्रभावित समुदायों तक बिना देरी के मदद पहुंचाने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी, समन्वित जमीनी कार्रवाई और जरूरी राहत एवं बहाली के उपाय किए जा रहे हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें