एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, अगर दशक की बात करें तो बच्चों के खिलाफ अपराध बेहद तेजी से बढ़ा है। यह 2007 से 2017 के दौरान 1.8 से बढ़कर 28.9 फीसदी तक जा पहुंचा है। यह बेहद भयावह स्थिति है।
अप्रत्याशित तौर पर बढ़ रहा अपराध
एनसीआरबी के आंकड़े हर दो साल के अंतराल में प्रकाशित किए जाते हैं। इसमें यह खुलासा हुआ है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले में 2016 में 1,06,958 अपराध दर्ज किए गए तो वहीं, 2017 में 1,29,032 अपराध के मामले दर्ज हुए। क्राई के मुताबिक, बच्चों के खिलाफ अप्रत्याशित रूप से अपराध बढ़ रहे हैं। यह खतरे की घंटी है।
बाल विवाह अब भी बड़ी चुनौती
क्राई ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बाल विवाह देश में अब भी सबसे बड़ी चुनौती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में करीब 1.2 करोड़ शादीशुदा बच्चे हैं। इनमें से करीब 75 फीसदी लड़कियां हैं।
2017 के एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, बाल विवाह प्रतिबंध कानून, 2006 के तहत 395 मामले दर्ज किए गए। इन अपराधों को दर्ज किए जाने में 21.17 फीसदी का इजाफा हुआ। वहीं, 2017 में ही किशोरों के खिलाफ अपराधों के 2,452 मामले दर्ज किए गए।