'सामने फल तो रखा है, लेकिन हम उसे खा नहीं सकते'
कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है। रिजल्ट आने के बाद उनके परिवार को यह आस बंधी थी कि अब उनकी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। उम्मीदवारों के मुताबिक, हम यहां पर नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारे कई साथी ऐसे हैं, जिनकी पढ़ाई लिखाई लोन पर हुई है। ऐसे में उन्हें जल्दी सहारा मिलना आवश्यक है। हमारी स्थिति ऐसी हो चली है कि सामने फल तो रखा है, लेकिन हम उसे खा नहीं सकते। शारीरिक ट्रेनिंग की उम्र निकलती जा रही है। हमें मालूम हुआ है कि ज्यादा आयु में शारीरिक ट्रेनिंग के दौरान कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं। 25 साल और 28 साल की आयु के दौरान शारीरिक ट्रेनिंग में फर्क नजर आता है। ट्रेनिंग के बाद कई वर्षों तक हार्ड पोस्टिंग मिलती है। वहां भी दिक्कतें आ सकती हैं। अधिक आयु में ट्रेनिंग होगी तो उसके फाइनल में कई उम्मीदवार पीछे रह जाते हैं। वे किसी बीमारी का शिकार होकर भर्ती प्रक्रिया से बाहर भी हो सकते हैं।
उम्मीदवारों ने डाली आरटीआई
उम्मीदवारों ने बताया, उन्होंने यूपीएससी और केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया है। यूपीएससी की तरफ से जवाब मिला कि हमारा काम पूरा हो चुका है। ट्रेनिंग की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की है। पोर्टल पर जब यह शिकायत डाली गई तो गृह मंत्रालय से जवाब मिला कि इस बारे में यूपीएससी ही कुछ कर सकता है। कई आवेदकों ने नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर आरटीआई डाली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और यूपीएससी, ये दोनों एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर अपने गले से फांस निकाल रहे हैं। इन्हें भावी ग्राउंड कमांडरों की कोई चिंता नहीं है।
देश की सुरक्षा मोर्चे पर खड़ा होने से पहले ही इन उम्मीदवारों के कदमों को लड़खड़ाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि वे दूसरी जॉब के बारे में सोचने लगे हैं। नियुक्ति पत्र न मिलने के कारण उनमें नकारात्मक भावना पैदा हो रही है। इनका कहना है कि उन्होंने देश सेवा के लिए सीएपीएफ में भर्ती होने का जज्बा पाला था। अब सरकार उस जज़्बे को आगे बढ़ाने की बजाए तोड़ने में लगी है। इस बाबत केंद्रीय सुरक्षा बलों के एक अधिकारी ने कहा, अभी ऐसा संभाावित है कि ट्रेनिंग सेंटरों पर पहले वाले बैच की ट्रेनिंग चल रही हो। सीआरपीएफ और बीएसएफ में पासिंग आउट परेड बाकी है। एसएसबी व आईटीबीपी में ट्रेनिंग सेंटर खाली हैं। ऐसी परिस्थितियों में नए बैच की ट्रेनिंग का शेड्यूल तैयार होने में अभी एक दो माह लग सकते हैं।