यूपीए-2 कार्यकाल में हुए 2जी घोटाले पर गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में फैसला सुनाया गया और सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से भारत सरकार के खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट का गठन किया था।
घोटाले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी का नाम भी शामिल था। इनके अलावा कई कंपनियां और कई कारोबारी भी इसमे आरोपी बनाए गए थे। सीबीआई ने अप्रैल 2011 में इस पूरे मामले में अदालत में करीब 80000 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी इस चार्जशीट में 125 गवाहों और 654 दस्तावेजों का जिक्र किया गया था।
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2010 में सबसे पहले टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले की बात सामने आयी थी। यह मामले का खुलासा सरकार की एजेंसी सीएजी रिपोर्ट में हुआ था। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस दौरान राजा दूरसंचार मंत्री थे, उस दौरान जो टूजी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया था, उससे देश को 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। टूजी घोटाले से जुड़े तीन मामलों में अदालत को अपना फैसला सुनाना है, इसमें दो सीबीआई और एक केस प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किया था।
टूजी स्पेक्ट्रम मामले में क्या और कब हुआ देखिए 1 नजर में-
ए राजा यूपीए-2 सरकार में दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया था ये 16 मई 2007 की बात थी।
केंद्र सरकार ने 25 अक्तूबर 2007 में मोबाइल सेवाओं के लिए टू जी स्पेक्ट्रम की निलामी की संभावनाओं को खारिज किया
दूरसंचार कंपनियों को सितंबर-अक्टूबर 2008 में स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए।
केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कई घोटाले पाए और 15 नवंबर 2008 को दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही
सीबीआई ने टू जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए 21 अक्तूबर 2009 मामला दर्ज किया
मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर 22 अक्तूबर 2009 छापेमारी की, जिसमें कई मामले सामने आए।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 17 अक्तूबर 2010 को दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया
दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ नवंबर 2010 में विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप्प की और उन्हें हटाने की मांग की
ए राजा ने 14 नवम्बर 2010 को इस्तीफा दिया
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को 15 नवम्बर 2010 को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया
टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में नवम्बर 2010 तक विरोध जारी रहा।
दूरसंचार विभाग ने 13 दिसम्बर 2010 को उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल की समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने का कार्यभार दिया गया और दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया
ए राजा पूरी तरह से सीबीआई के गिरफ्त में थी और 24 और 25 दिसम्बर 2010 को उनसे पूछताछ की जाती रही वहीं राजा से तीसरी बार 31 जनवरी 2011 को फिर से पूछ -ताछ की गई और समीति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
टू जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने 2 फरवरी 2011 गिरफ्तार कर लिया