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कृषि हित के लिए भारत की अमेरिका को दो टूक- सब्सिडी खत्म नहीं होगी

Thu, 21 Dec 2017 11:20 AM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली 
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डब्ल्यूटीओ
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केंद्र की मोदी सरकार पर बेशक किसान विरोधी होने के आरोप लगते हों। मगर किसानों के हित के लिए सरकार ने अमेरिका को भी दो टूक सुना दिया है। अर्जेंटिना में संपन्न हुई विश्व व्यापार संगठन की बैठक में भारत सरकार के वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु और संघ की संस्थाओं ने अमेरिका के तर्कों के खिलाफ भारतीय हितों पर जोरदार पक्ष रखा। सुरेश प्रभु ने अपने संबोधन में कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी की अमेरिकी रणनीतिकार कुछ मोलभाव कर सकें।
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बताया जा रहा है कि विश्व व्यापार संगठन में शिरकत करने जाने से पहले संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने सुरेश प्रभु को पत्र के जरिए स्पष्ट कर दिया था कि वे भारतीय हितों से कोई समझौता न करें। संघ की थपकी का असर विश्व व्यापार संगठन की बैठक में प्रभु के रवैये पर स्पष्ट नजर आया। 10 से 13 दिसंबर तक अर्जेंटिना में विश्व व्यापार संगठन की बैठक चली थी। इसमें प्रभु और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि और तमाम गैर सरकारी संगठनों के सदस्य बैठक में भाग लेने पहुंचे थे। 

भारत में कृषि सब्सिडी को बंद कराने के पक्ष में अमेरिका
विश्व व्यापार संगठन की बैठक से लौटे संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने अमर उजाला को बताया कि अमेरिका का मुख्य जोर भारत में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी खत्म करने, यहां ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने और विदेशी निवेशकों को ज्यादा रियायतें दिलाने पर था। मगर सरकार के स्पष्ट रूख से अमेरिकी कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकीं। 
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कृषि क्षेत्र पर क्यों है अमेरिका की नजर 
महाजन की मानें तो अपने हरेक किसान को प्रति वर्ष 64 हजार डॉलर से ज्यादा सब्सिडी देने वाला अमेरिका भारतीय किसानों को मिलने वाली सब्सिडी इसलिए दूर करना चाहता है कि यहां के अनाज बाजार में अपनी पकड़ बना सके। स्वदेशी जागरण मंच के अनुसार विश्व व्यापार संगठन की बैठक में अमेरिका की मंशा सरकार के जरिए की जाने वाले अनाज खरीद को बंद कर किसानों के भरोसे छोड़ने की थी। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि भारत में ई-कॉमर्स पर कोई बंदिशें न हों, इस क्षेत्र में वह फ्री फ्लो चाहता है, ताकि यहां के डाटा को बाहर ले जा सके। जबकि भारत सरकार ने डाटा बाहर ले जाने पर रोक के साथ फ्री फ्लो पर नकेल कसते हुए ई-कमार्स के प्लेयरों को ज्यादा डिस्काउंट न देने की बंदिशें लगा रखी हैं।

अमेरिका इन बंदिशों को खत्म कराना चाहता था ताकि ई-कामर्स के व्यापार में लगी उसकी कंपनियों को लाभ मिल सके। इसलिए वह विश्व व्यापार संगठन में ई-कामर्स पर फास्ट ट्रेक की तरह कार्य चाहता था। मगर भारत सरकार ने अमेरिका के इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए आपत्ती जताई की यह विषय विश्व व्यापार संगठन में फास्ट ट्रेक से जुड़ना तो दूर चर्चा लायक मुद्दा भी नहीं है। 
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Agriculture - फोटो : DEMO PHOTO
भारतीय निवेशकों सरीखे रियायत चाहता है अमेरिका
अश्विनी महाजन के अनुसार अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन की बैठक में इंवेस्टेमेंट फेसिलिटेशन की मांग की। इसके जरिए वह अपने निवेशकों के लिए तमाम वह सुविधाएं चाहता है जोकि भारत में अपने निवेशकों को उद्योग लगाने के वक्त मिलती हैं। इसके अलावा अमेरिका की मांग थी कि भारत अपने यहां गैर-पंजीकृत मछली पालन क्षेत्र को सब्सिडी न दें। मगर भारत में पारंपरिक मछुआरों और मत्स्य उद्योग से जुड़े लोगों के हितों का ध्यान रखते हुए इस मांग को भी खारिज कर दिया। 

आखिर क्यों चाहता है अमेरिका भारत न करें किसानों के उत्पाद की खरीद 
सरकार के जरिए किसानों के उत्पाद की खरीद पर अमेरिका के जरिए उठाए जा रहे सवालों पर स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि भारत सरकार के जरिए की जाने वाली अनाज की खरीद को इसलिए बंद कराना चाहता है, ताकि वह अपने यहां का सस्ता अनाज यहां के बाजारों में पटक कर खाद्यान्न बाजार पर अपनी पकड़ बनाए। मगर यह विषय विश्व व्यापार में उठाने लायक ही नहीं है। हम इसके खिलाफ आंदोलन चलाएंगे।

अश्विनी महाजन का कहना है कि देश की खाद्य सुरक्षा से लेकर किसानों का हित सरकारी खरीद से सुरक्षित है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार अनाजों की खरीद कर भारतीय खाद्य निगम में रखती है। और अपने हिसाब से उसका वितरण करती है। सरकारी खरीद बंद करने की अमेरिकी मांग से न सिर्फ हमारे किसानों की स्थिति बिगड़ेगी बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा पर खतरा बढ़ेगा। दाल और तिलहन के क्षेत्र में रियायत देकर सरकार ने देश को इस दिशा में निर्भर बनाया है।
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