सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि व्यापम घोटाले से जुड़ी मौतों पर विवाद तब पैदा हुआ जब मध्य प्रदेश पुलिस ने दाखिले और भर्ती घोटाले से जुड़े मामलों में अपनी प्राथमिकी में मृत व्यक्तियों के नाम बतौर आरोपी शामिल किए।
मध्य प्रदेश में दाखिले और भर्ती घोटाले में शामिल संदिग्धों को बचाने की कथित साजिश की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी को 24 लोगों की मौत की जांच करने के लिए कहा गया था। जांच में पाया गया कि 24 मौतों में से 16 व्यक्तियों की मौत व्यापक घोटाले में राज्य पुलिस द्वारा आरोपी बनाए जाने से काफी पहले ही हो चुकी थी।
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सीबीआई ने मौतों के पीछे किसी तरह की साजिश से इनकार किया है। सीबीआई ने कहा कि बाकी लोगों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। सूत्रों का कहना है कि राम शंकर (बदला हुआ नाम) की मौत 18 जून 2007 को डूबने के कारण हुई थी लेकिन मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) में कथित अनियमितताओं से जुड़ी प्राथमिकी में सात साल बाद बतौर आरोपी उसका नाम जोड़ा गया।
शंकर की मौत की जांच में पाया गया कि उसकी मौत 18 जून 2007 को हुई थी जबकि 18 जून 2014 को दर्ज प्राथमिकी में राज्य पुलिस ने उसका नाम कथित बहरूपिये के तौर पर दर्ज किया, जिसने रुपयों के बदले उम्मीदवारों के परीक्षा पत्र हल किए। जांच में कहा गया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी डूबने से मौत की बात कही गई है। दो प्रत्यक्षदर्शियों ने इस बात की पुष्टि की।