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Violation of Decorum: देश के 204 पूर्व सैनिक-अफसर नाराज, संसद में व्यवहार को लेकर राहुल गांधी से माफी की मांग

Tue, 17 Mar 2026 03:42 PM IST
Pavan डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

संसद परिसर में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के चाय बिस्किट खाने-पीने का मामला अब तूल पकड़ रहा है। देश के कई पूर्व अधिकारी और सैनिकों ने उनसे माफी की मांग की है। इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस. पी. वैद ने किया है। कुल 204 लोगों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें 116 रिटायर्ड सैन्य अधिकारी और 84 पूर्व नौकरशाह शामिल हैं। इनमें कुछ पूर्व राजदूत और वरिष्ठ वकील भी शामिल हैं। 
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संसद परिसर में चाय पीते राहुल गांधी और अन्य नेता - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के 204 पूर्व सैनिकों, रिटायर्ड अफसरों, पूर्व राजनयिकों और वकीलों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। इन लोगों का कहना है कि संसद परिसर में उनके हालिया व्यवहार से संसद की गरिमा और नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह मामला 12 मार्च का बताया जा रहा है, जब संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे थे। आरोप है कि लोकसभा स्पीकर की ओर से पहले ही संसद परिसर में किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन किया गया।
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पूर्व अधिकारियों और सैनिकों ने लिखा एक पत्र
पूर्व अधिकारियों और सैनिकों ने एक पत्र जारी करते हुए कहा कि यह कदम न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसद जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने इसे 'जानबूझकर की गई अवज्ञा' बताया और कहा कि इससे यह संदेश जाता है कि व्यक्तिगत राजनीति को संस्थाओं की मर्यादा से ऊपर रखा जा रहा है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी और कुछ अन्य सांसद संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट लेते हुए प्रदर्शन कर रहे थे, जो संसद के स्तर के अनुसार बिल्कुल उचित नहीं है। उनका कहना है कि संसद केवल बहस और कानून बनाने का मंच है, न कि राजनीतिक प्रदर्शन का स्थान।
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'राहुल समेत अन्य सांसदों का प्रदर्शन संसद के स्तर नहीं'
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी और कुछ अन्य सांसद संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट लेते हुए प्रदर्शन कर रहे थे, जो संसद के स्तर के अनुसार बिल्कुल उचित नहीं है। उनका कहना है कि संसद केवल बहस और कानून बनाने का मंच है, न कि राजनीतिक प्रदर्शन का स्थान। हस्ताक्षर करने वालों ने संसद को 'लोकतंत्र का मंदिर' बताते हुए कहा कि इसकी गरिमा सिर्फ सदन के अंदर ही नहीं, बल्कि पूरे परिसर, जैसे सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी, में बनाए रखना जरूरी है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और जनता के बीच गलत संदेश देती हैं।
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पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से देश से माफी की मांग की
पत्र में यह भी कहा गया है कि संसद में बार-बार होने वाले विरोध और हंगामे से जनता का समय बर्बाद होता है और संसद का कामकाज प्रभावित होता है। साथ ही, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी की जिम्मेदारी और भी ज्यादा है, इसलिए उनका व्यवहार अनुकरणीय होना चाहिए। आखिर में, इन सभी पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से देश से माफी मांगने और अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करने की अपील की है, ताकि संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे।

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