सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश
निर्भया को मिला इंसाफ
5 साल पहले 16 दिसंबर को हुए निर्भया रेप मामले में पिछले साल मई में मौत की सजा पाए चारों दोषियों की ओर से दाखिल रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 9 जुलाई को फैसला सुनाया। निर्भया गैंगरेप मामले (निर्भया कांड) में सुप्रीम कोर्ट चार दोषियों में से तीन की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाके हुए तीनों दोषियों की याचिका खारिज कर दी और अब उनकी फांसी की सजा को उम्र कैद में भी नहीं बदला जाएगा। यानी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा।
बता दें कि 4 मई को निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने दोषियों विनय, पवन और मुकेश की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था। दोषी अक्षय ने पुनर्विचार याचिका अभी दायर नहीं की है। मामले की सुनवाई के दौरान दोषियों की तरफ से कहा गया कि ये मामला फांसी की सजा का नहीं। जो गरीब पृष्ठभूमि से आए हुए हैं, वो आदतन अपराधी नहीं हैं इसलिए सुधरने का मौका दिया जाए।
अब समलैंगिकता अपराध नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने एकमत से ये फैसला सुनाया है। करीब 55 मिनट में सुनाए इस फैसले में धारा 377 को रद्द कर दिया गया । सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि एलजीबीटी समुदाय को भी समान अधिकार है।
धारा 377 के जरिए एलजीबीटी की यौन प्राथमिकताओं को निशाना बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन प्राथमिकता बाइलोजिकल और प्राकृतिक है। अंतरंगता और निजता किसी की निजी च्वाइस है। इसमें राज्य को दखल नहीं देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन है। धारा 377 संविधान के समानता के अधिकार आर्टिकल 14 का हनन करती है।
कावेरी जल विवाद- 'पानी पर सबका हक'
कावेरी जल विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि नदी के पानी पर किसी भी स्टेट का मालिकाना हक नहीं है। कर्नाटक को आदेश दिया कि वह बिलिगुंडलू डैम से तमिलनाडु के लिए 177.25 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक) फीट पानी छोड़े। हालांकि कोर्ट ने तमिलनाडु को मिलने वाले पानी में 14.75 टीएमसी फीट की कटौती की है। यानी अब उसे पहले से 5% कम मिलेगा। वहीं, कर्नाटक के कोटे में 14.75 टीएमसी का इजाफा किया है।