गुजरात में 2002 में गोधरा कांड के बाद आणंद जिले के ओदे में हुए दंगे के 15 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जमानत दे दी। इस दंगे में 23 लोगों को जिंदा जला दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में 19 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 15 दोषियों की ओर से दायर चार याचिकाओं पर विचार के बाद कोर्ट ने कई शर्तों के साथ उन्हें जमानत दी। कोर्ट ने सभी को 25-25 हजार रुपये का निजी मुचलका देने का भी निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने दोषियों को जमानत देते हुए इस अवधि के दौरान सामाजिक, अध्यात्मिक सेवा करने को कहा है। कोर्ट ने दोषियों के एक समूह को इंदौर, जबकि दूसरे को जबलपुर जाने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि जमानत की शर्तों के तहत सभी दोषियों को प्रत्येक हफ्ते छह घंटे की मंदिर, गुरुद्वारे या अस्पताल में जाकर सेवा करनी होगी। साथ ही हर हफ्ते स्थानीय थाने में पेश होना पड़ेगा।
कोर्ट ने इंदौर और जबलपुर में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि दोषी जमानत की शर्तों का सख्त पालन करें। साथ ही अथॉरिटी को दोषियों के लिए उचित रोजगार ढूंढने में मदद करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश लीगल सर्विस अथॉरिटी को हर तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
जमानत पाने वाले दोषियों में प्रहलादभाई जगभाई पटेल, पुरषोत्तमभाई, विजयभाई रावजीभाई पटेल, जयेंद्रभाई साताभाई पटेल, सुरेशभाई भैलाभाई पटेल, प्रवीणभाई मंगलभाई पटेल, दिलीपभाई रणछोड़भाई पटेल, धर्मेश कुमार नाथूभाई पटेल, दिलीपभाई वीनूभाई पटेल, पारसभाई रणछोड़भाई पटेल, अरविन्दभाई रावजीभाई पटेल, हेमंतभाई साताभाई पटेल, संतकुमार रणछोड़भाई पटेल, विनूभाई शानाभाई पटेल और विनुभाई भीभूभाई पटेल शामिल हैं।