अपने ही विषय में फेल हुए पंजाब के सरकारी टीचर्स
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कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी। बेशक यह कहावत अब किताबों में ही सिमट कर रह गयी हो लेकिन भारत सरकार अब हिंदुस्तान की विलुप्त बोलियों और भाषाओं को संरक्षण देगी।
यूनेस्को ने भारत की प्राचीन 197 भाषाओं को विलुप्त और 42 को अति विलुप्त माना है। इन्हीं दो श्रेणियों को अब सरकार संरक्षण, अनुरक्षण व अभिलेखन के माध्यम से आगामी पीढ़ियों तक पहुंचाएगी।
खास बात यह है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय इन विलुप्त भाषाओं को पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाएगा।
इसके अलावा इन भाषाओं को हेरिटेज की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, प्राचीन भारत में कई बोलियां और भाषाएं बोली जाती थी लेकिन समय के साथ उनके बोलने वालों में कमी आयी और धीरे-धीरे विलुप्त होती गयीं।
विलुप्त और अति विलुप्त बोलियों और भाषाओं में से उनका चयन किया गया है, जिनके बोलने वालों की संख्या प्राचीन समय में दस हजार से अधिक रही होगी। इसमें कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से नार्थ-ईस्ट की बोलियां और भाषाएं भी शामिल हैं।
पर्वतीय भाषाओं पर भी संकट
भारतीय भाषा
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अधिकारी के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश की भरमौरी, चाम्बियली, मंडयाली, स्पीति, कांगड़ी, मंडा, किन्नौरी तो उत्तराखंड की गढ़वाली, कुमाउनी और जम्मू-कश्मीर की लद्दाखी भाषाओं पर भी संकट है। भाषाओं के संरक्षण के लिए कमेटी भी गठित की गयी है। सोशल मीडिया के माध्यम से देश ही नहीं, दुनिया से इन भाषाओं के जानकारों को जोड़ा जाएगा।
इसके लिए जल्द ही मोबाइल ऐप, फॉन्ट भी बनाए जाएंगे। इन भाषाओं को सूचीबद्ध करने का जिम्मा भारतीय भाषा संस्थान मैसूर को दिया गया है।
विशेषज्ञ लुप्तप्राय भाषाओं, जनजातीय भाषाओं या मातृभाषाओं को साइबर स्पेस में जगह दिलाएगी। पहले चरण में सभी 22 प्रमुख बोली जाने वाली भाषाओं को संरक्षण दिया जाएगा, उसके बाद दूसरे चरण में विलुप्त भाषाओं को प्राथमिकता मिलेगी।
विलुप्त भाषाओं को बचाने के लिए मोबाइल ऐप, फॉन्ट, सॉफ्टवेयर, अनुवाद उपकरण भी तैयार किए जाएंगे। और इन भाषाओं का होगा संरक्षण
एंटोंग, आदि, अहोम, ऐमोल एका, एनल, एंड्रो, अंगामी, अंगिका, एओ, अपातानी, असुर, बडागा, बघाति, बाल्ती, बंगानी, बवम, बेल्लारी, भद्रवाही, भलेसी, भुम्जी, बीते, बिरहोर, विश्नुप्रिया मणिपुरी क्रियोल, बोडो, बोकार, बोरी, ब्रोकशत, बुनन, ब्यांग्सी, चांग चोकरी, चुराही, डकपा, चुओना मेनबा, डरमा, देवरी, दिमासा, गडाबा, गालो, गंग्टे, गेता, गोंडी, गोरूम, ग्रेट अंडमानी, गुटोब, हंदुरी, हिल मिरी, हमार, हो, हंरगखोल, इदू, इरुला, जड़, जंगशुंग, जारवा, जौनसारी, जुआंग, कबई, कछारी, कनाशी, कार्बी, खंबा, खम्प्ती, खरिया, खसाली, खेजा, ख्यिामंगन, खोइराओ, खोवा, कोच, कोड़ा, कोडागु, कोइरंग, कोकबोरोक, कोलामी, कॉम, कोंडा, कोन्याक, कोरकू, कोरो, कोरवा, कोटा, कुई, कुलुई, कुमाउनी, कुडल शाही, कुर्रु, कुरुबा, कुरुक्स, कुवी, लमगांग, लमोंग्से, लंग्रोंग, लेप्चा, ल्होटा, लियांग्मई, लिंबु, लिशपा, लुरो, महासुई, माल्टो आदि शामिल हैं।